126 साल और 3 जन्म! पूर्व IAS की प्रोफेसर पत्नी का दावा- ‘मुझे याद हैं पुनर्जन्म के सारे रिश्ते’, जानिए पूरा मामला
रिटायर्ड प्रोफेसर स्वर्णलता तिवारी
Bhopal: क्या आप इस बात पर विश्वास करते है कि किसी को अपने पिछले जन्म की घटनाएं याद हो. दरअसल भोपाल की 79 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर स्वर्णलता तिवारी का कहना है कि उन्हें अपने एक नहीं दो नहीं बल्कि तीन जन्मों की घटनाएं याद हैं. इतना ही नहीं उन्हें कुछ रिश्तेदार, जगहें और परिवार भी याद हैं. इस कहानी ने सोशल मीडिया से लेकर वैज्ञानिकों तक का ध्यान अपनी तरफ खीच लिया है.
वर्तमान जीवन से कोई लेना-देता नहीं
डॉ. स्वर्णलता तिवारी का कहना है कि बचपन से ही उन्हें ऐसी धटनाएं ऐसे स्थान और ऐसे दृश्य याद आते थे जिनका उनके इस यानी कि वर्तमान जीवन से कोई लेना-देता नहीं है. जब उम्र के साथ-साथ उनकी ये यादें और बढ़ती गई तो फिर उन्होंने इसके बारे में विस्तार से बताया. जिसके बाद कई तथ्य सामने आए और फिर उनकी जांच कराई गई.
कटनी का संपन्न परिवार
उनकी कहानी में दावा किया गया है कि एक जन्म में वे कटनी के एक संपन्न परिवार से जुड़ी थीं, जबकि उससे पहले के जीवन से जुड़े भी कई प्रसंग उन्हें याद हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पुराने परिवार के कई सदस्यों को पहचानने और उनसे मिलने के बाद उनकी स्मृतियां और मजबूत हुईं.
मामले की सबसे दिलचस्प पहलू
इस मामले की सबसे दिलचस्प पहलू ये कि स्वर्णतला तिवारी के इस दावे को केवल परिवारिक नहीं रहने दिया गया बल्कि तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मध्य प्रदेश के पूर्व डीजीपी रह चुके डॉ. एचपी मिश्र ने इस मामले में तथ्यों की जांच कराई. इस जांच के दौरान सर्वणतला तिवारी द्वारा बताए गए कई बिंदुओं का मिलान किया गया और ये मामला लंबे समय तक चर्चा में बना रहा.
सबसे भावुक और अनोखा पहलू
स्वर्णलता जी की कहानी का सबसे भावुक और अनोखा पहलू उनके रिश्ते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने अब तक जहां-जहां जन्म का दावा किया है, उन परिवारों के लोग भी उनसे बराबर जुड़े हैं. कई तो उम्र में बड़े या बराबर के हैं, फिर भी बड़ी मां का संबोधन देते हैं.
पहला जन्म (1900-1939): कटनी के पाठक परिवार में जन्म हुआ (पूर्व मंत्री संजय पाठक के परिवार का नाता), विवाह मैहर के चिंतामणि पांडे से हुआ. 39 की उम्र में निधन हो गया.
दूसरा जन्म (1940-1947) बांग्लादेश के सिलहट में कमलेश गोस्वामी के रूप में जन्म, 1947 में सड़क हादसे में मौत.
तीसरा (वर्तमान) जन्म (1948 से अब तक) टीकमगढ़ में जन्म, पूर्व IAS डीपी तिवारी से विवाह और बॉटनी प्रोफेसर का सफर.
पुनर्जन्म को लेकर अलग-अलग मान्यताएं
पुनर्जन्म को लेकर दुनिया भर में अलग-अलग मान्यताएं और विचार हैं. जहां कई धार्मिक परंपराएं इसे स्वीकार करती हैं, वहीं मुख्यधारा का विज्ञान अभी तक इसे निर्णायक रूप से सिद्ध नहीं मानता. ऐसे में प्रो. स्वर्णलता तिवारी का मामला आज भी रहस्य, जिज्ञासा और बहस का विषय बना हुआ है.
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