जेब में जांच की पर्ची, तारीख 2027 की… एम्स भोपाल में मरीजों की बढ़ी परेशानी, MRI-CT के लिए महीनों की वेटिंग
एम्स भोपाल (फाइल फोटो)
Bhopal News: भोपाल के एम्स में मध्य प्रदेश के साथ छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. डॉक्टर की जांच के बाद मरीजों को जरूरी टेस्ट कराने के लिए लंबी तारीख मिल रही है. MRI के लिए करीब एक साल और CT स्कैन के लिए 8 से 9 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है.
MRI के लिए एक साल बाद की तारीख
भोपाल एम्स में 1.5 टेस्ला की MRI मशीन से रोज करीब 33 मरीजों की जांच हो रही है. मरीजों की संख्या अधिक होने से वेटिंग लगातार बढ़ रही है. एक मरीज को MRI के लिए 26 अक्टूबर 2027 की तारीख दी गई है. सीमा गुप्ता को मार्च 2027 और सरोज प्रजापति को 13 जुलाई 2027 की तारीख मिली है.
CT स्कैन के लिए भी लंबी कतार
128 स्लाइस वाली दो CT मशीनें 24 घंटे चलने के बावजूद रोज करीब 88 मरीजों की जांच हो पा रही है. श्यामा नापित को CT स्कैन के लिए 26 मार्च 2027, जबकि एक अन्य मरीज को 13 सितंबर 2027 की तारीख मिली है. सोनोग्राफी के लिए भी अश्विन टिक्का को जनवरी 2027 तक इंतजार करना पड़ रहा है.
592 एक्स-रे, फिर भी रिपोर्ट में देरी
एम्स में डिजिटल एक्स-रे की चार मशीनें हैं और रोज करीब 592 जांच हो रही हैं. इसके बावजूद रिपोर्ट मिलने में दो से तीन दिन लग रहे हैं. सोनोग्राफी-अल्ट्रासाउंड की छह मशीनों से रोज करीब 215 जांच होती हैं, लेकिन यहां भी दो से तीन महीने की वेटिंग है. कलर डॉप्लर, मैमोग्राफी और डेक्सा स्कैन के लिए एक से दो महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है.
चार मशीनों पर 20 मरीजों का दबाव
नेफ्रोलॉजी विभाग में डायलिसिस के लिए चार मशीनें हैं. रोज करीब 20 मरीज पहुंचते हैं, लेकिन केवल आठ मरीजों का ही डायलिसिस हो पाता है. बाकी मरीजों को अगले दिन की तारीख दी जाती है. किडनी फेल्योर और लिवर सिरोसिस से पीड़ित मरीजों को इससे काफी परेशानी हो रही है.
एक दिन में हुई 940 जांच
रेडियोलॉजी विभाग में एक दिन में 940 जांच दर्ज की गईं. इनमें 592 एक्स-रे, 215 अल्ट्रासाउंड, 88 CT स्कैन, 33 MRI और 12 मैमोग्राफी शामिल हैं. प्रयोगशालाओं में भी रोज 1500 से ज्यादा नमूनों की जांच की जा रही है. वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डॉ. शैलेष लुनावत के मुताबिक, सीजन में रेडियोलॉजी ओपीडी 1200 से 1300 मरीज तक पहुंच जाती है. ऐसे में CT और MRI मशीनों की संख्या बढ़ाना जरूरी है.
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