Gwalior: ग्वालियर की ‘वॉटर वूमेन’, सूखे कुएं और बावड़ियों को जीवनदान देकर अरबों लीटर पानी निकाला

ग्वालियर की रहने वाली सावित्री श्रीवास्तव वॉटर वुमेन के नाम से मशहूर हैं. उन्होंने वॉटर हार्वेस्टिंग के जरिए अरबों लीटर पानी बचाया है.
Gwalior's water woman saved billions of liters of water

ग्वालियर की वॉटर वुमेन ने वॉटर हार्वेस्टिंग से हजारों लीटर पानी बचाया.

Gwalior ‘Water Woman’: कितना मुश्किल होता है एक महिला होना और पारिवारिक जिम्मेदारी संभालते हुए खुद की पहचान बनाना. ग्वालियर की रहने वाली सावित्री श्रीवास्तव भी एक ऐसी ही महिला हैं. जल संरक्षण की मुहिम का जुनून और लक्ष्य में आने वाली चुनौतियों को दरकिनार करके अपने जिले में इतिहास रच दिया है. सावित्री श्रीवास्तव ने सूखे पड़े, कुएं, बावड़ियों को सींचकर अरबों लीटर पानी को निकाला है. उनका वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट पानी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

वाटर हार्वेस्टिंग कर सूखे कुओं को सींचा

अपने जल संरक्षण के प्रयासों के लिए जानी जाने वाली वाटर वूमन सावित्री श्रीवास्तव ने सरकारी, गैर सरकारी और सडकों पर एक हजार से ज्यादा रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट लगाकर अरबों खरबों जल को सीधे जमीन के अंदर पहुंचाया. जिससे जमीन का वॉटर लेवल बढ़ गया. इसके अलावा वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए आसपास हरियाली लाने में अपना योगदान दिया. ग्वालियर से निकलते हाईवे पर उन्होंने जनसहभागिता के माध्यम से चालीस वाटर हार्वेस्टिंग पिट लगाकर करोड़ों लीटर पानी की बचत की. ग्वालियर संभाग के सबसे बड़े शिक्षण संस्थान जीवाजी विश्विद्यालय और पूरे शहर भर में पिछले कई सालों से सूखे पड़े बोरवैल और कुएं, बावड़ी को रिचार्ज कर उन्हें जीवनदान दिया.

18 साल पहले की जल संरक्षण की शुरुआत

सावित्री श्रीवास्तव ने 18 साल पहले जल संरक्षण की शुरूआत की. उन्होंने अपने घर से ही इस मुहिम की शुरुआत की. नल से बहता एक-एक बूंद पानी, वॉश बेसिन से बहते वेस्ट पानी, लोगों द्वारा गाड़ी धोने के लिए इस्तेमाल पानी उनको हमेशा अखरता था. इसलिए उन्होंने इस पानी को बचाकर इसका इस्तेमाल करने का संकल्प लिया.

छोटे से कस्बे में शादी हुई

पंजाब के पटियाला में एक आर्मी मैन की बेटी के रूप में जन्म लेने वाली सावित्री श्रीवास्तव की शिक्षा देश के अलग अलग राज्यों में हुई है पढ़ने की बहुत इच्छा होने के बाद भी बीएससी तक ही पढ़ाई की. पारंपरिक परिवार होने के कारण शादी कर दी गई. उनकी शादी मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के छोटे से कस्बे में हुई. लेकिन इसके बावजूद सावित्री श्रीवास्तव ने चुनौतियों का जमकर सामना किया.

बीमार पति और बच्चों को भी संभाला

सावित्री श्रीवास्तव ने बताया कि लोग उनके जल संरक्षण की मुहिम का मजाक उड़ाते थे. इसके चलते उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था. बीमार पति और छोटे बच्चों को संभालते हुए उन्हें अपना लक्ष्य भी प्राप्त करना था. जिसमें आर्थिक सामाजिक और पारिवारिक तौर पर बहुत सारी चुनौतियों से जूझना पड़ा. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी भी अपना हौसला कम नहीं होने दिया.

ज़रूर पढ़ें