मऊगंज के जंगलों में ‘हरे सोने’ की खुली लूट! रातभर चलता तेंदूपत्ता माफियाओं का खेल, सुबह बेखौफ लौटते कारोबारी!
तेंदूपत्ता की कालाबाजारी
मऊगंज जिले के जंगलों में इन दिनों तेंदूपत्ता माफियाओं का खुला खेल जारी है. जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था और वन विभाग की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. सीतापुर, पहाड़ी, शिवराजपुर, गौरी, बिलौही और दामोदरगढ़ के जंगलों में रातभर अवैध रूप से तेंदूपत्ता तोड़े जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक देर रात सैकड़ों वाहन और हजारों लोग जंगलों में पहुंचते हैं और सुबह बेखौफ लौट जाते हैं.
तेंदू पत्ता बन चुका माफियाओं की कमाई का जरिया
तेंदूपत्ता को ही हरा सोना कहा जाता है. इसकी तुड़ाई और खरीदी के लिए शासन द्वारा नियम तय किए जाते हैं, समितियां बनाई जाती हैं और निगरानी के लिए वन अमला तैनात रहता है. इसके बावजूद मऊगंज में नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर अवैध तुड़ाई की जा रही है. सूत्रों का दावा है कि माफिया बिना अनुमति जंगलों में घुसकर लाखों रुपए का तेंदूपत्ता निकाल रहे हैं और काली कमाई का बड़ा खेल चल रहा है.
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी अवैध गतिविधियां जिम्मेदारों की नजर से कैसे बच रही हैं? जब समितियां गठित हैं और निगरानी के लिए वन अमला मौजूद है, तो फिर रोजाना जंगलों में चल रहे इस खेल पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? लोगों का आरोप है कि वन विभाग सबकुछ जानते हुए भी मौन बना हुआ है, जिससे विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं.
सरकार को नुकसान, माफिया मालामाल!
ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों की प्राकृतिक संपदा की खुली लूट से सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है. वहीं दूसरी ओर अवैध कारोबारी जंगलों से निकाले जा रहे तेंदूपत्ते को बेचकर मोटी कमाई कर रहे हैं. लगातार हो रही अवैध तुड़ाई से जंगलों के संरक्षण पर भी खतरा बढ़ता जा रहा है.
कार्रवाई का इंतजार!
अब लोगों की निगाहें प्रशासन और वन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं. सवाल यही है कि आखिर कब तक मऊगंज के जंगल यूं ही लुटते रहेंगे? कब वन विभाग अवैध तेंदूपत्ता माफियाओं पर सख्त कार्रवाई करेगा? और कब रुकेगा हरे सोने की काली कमाई का यह खेल?