MP News: जीतू पटवारी और पीसी शर्मा समेत कांग्रेस नेताओं का एक दिवसीय उपवास, बोले- अविमुक्तेश्वरानंद का अपमान नहीं सहेंगे

पीसी शर्मा ने कहा, 'चार पीठों में से एक पीठ के शंकराचार्य हैं, उनका अपमान किया गया. शंकराचार्य को स्नान करने नहीं जाने दिया गया. बटुकों की चोटी पकड़कर उन्हें पीटा गया. क्या यही हिंदुत्व है?'
Former minister PC Sharma and PCC chief Jitu Patwari.

पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और PCC चीफ जीतू पटवारी.

MP News: प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान से रोके जाने का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. मध्य प्रदेश कांग्रेस ने शनिवार को गौ हत्या, अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती के अपमान समेत कई मुद्दों को लेकर एक दिवसीय उपवास रखा है. पूर्व मंत्री पीसी शर्मा के नेतृत्व संपूर्ण कांग्रेस का ये एक दिवसीय उपवास है. इसमें पीसीसी चीफ जीतू पटवारी समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नेता शामिल हुए.

‘जो काम मुगलों और अंग्रेजों ने नहीं किया, वो काम सरकार कर रही’

पीसी शर्मा ने कहा, ‘चार पीठों में से एक पीठ के शंकराचार्य हैं, उनका अपमान किया गया. शंकराचार्य को स्नान करने नहीं जाने दिया गया. बटुकों की चोटी पकड़कर उन्हें पीटा गया. क्या यही हिंदुत्व है? शंकराचार्य को जान से मारने की धमकी दी जा रही है. अंग्रेजों और मुगलों ने सैकड़ों साल शासन किया लेकिन शंकराचार्यों से प्रमाण नहीं मांगा, लेकिन ये सरकार शंकराचार्य से प्रमाण मांग रहे हैं.’

‘शंकराचार्य से माफी मांगें और दोषियों पर कार्रवाई हो’

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मध्य प्रदेश में गौ हत्या हो रही है और गौ मांस की तस्करी की जा रही है. लेकिन सरकार कोई भी कार्रवाई नहीं कर रही है. प्रयागराज में जिस तरह शंकराचार्य का अपमान किया गया, ये साफ तौर पर दिखा रहा है कि भाजपा सनातन विरोधी है. कांग्रेस नेताओं ने शंकराचार्य से माफी मांगने की मांग की है. साथ ही कहा कि दोषियों पर सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए.

अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोके जाने के बाद विवाद

पूरा मामला प्रयागराज के माघ मेले का है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अपने शिष्यों के साथ स्नान करने जा रहे थे. इस दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया. आरोप है कि पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद को पालकी से उतरकर स्नान घाट पर जाने के लिए कहा. आरोप है कि जब अविमुक्तेश्वरानंद ने मना कर दिया तो पुलिस ने उनके समर्थकों की पिटाई कर दी. इतना ही नहीं प्रयागराज मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को अपने नाम के आगे शंकराचार्य लगाने को लेकर नोटिस भी दिया था. इसके बाद से विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है.

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