MP News: भोपाल डिक्लेरेशन के 25 साल पूरे होने से पहले डिक्लेरेशन-2 की ड्राफ्टिंग बैठक हुई, दलित एजेंडे को लेकर आम लोगों से सुझाव लिए जाएंगे

पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि अधिकारियों की वजह से दलित एजेंडा फेल हुआ है. दलित एजेंडा अधकचरा था. दलित एजेंडा फेल होने से तीसरी बार दिग्विजय सिंह की सरकार नहीं आ पाई.
Congress leader Digvijay Singh

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह

MP News: दिग्विजय सरकार में लागू किए गए भोपाल डिक्लेरेशन के 25 साल पूरे होने से पहले भोपाल डिक्लेरेशन-2 की ड्राफ्टिंग बैठक हुई. दलित एजेंडे को लेकर आम लोगों से भी सुझाव लिए जाएंगे. साल 2027 में दलित एजेंडा जारी किया जाएगा. डिक्लेरेशन 02 पर हो रही चर्चा में सज्जन सिंह वर्मा और दिग्विजय सिंह आमने सामने नजर आए.

‘अधिकारियों ने फेल किया दिग्विजयसिंह का दलित एजेंडा’

पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि अधिकारियों की वजह से दलित एजेंडा फेल हुआ है. दलित एजेंडा अधकचरा था. दलित एजेंडा फेल होने से तीसरी बार दिग्विजय सिंह की सरकार नहीं आ पाई. मध्य प्रदेश में एससी-एसटी के उत्थान का कदम उठाया गया था. दलित एजेंडा 2002 में लागू किया था. दलित एजेंडा पवित्र मन से लाया गया था, लेकिन अधकचरा था. फेल करने में अधिकारियों ने भूमिका निभाई थी. तहसीलदार-अधिकारियों ने जमीन देने में 12-15 हजार लिए और पट्टे बना दिए,
लेकिन अब तक कई लोगों को लाभ नहीं मिला है. हम उस समय सही इम्प्लीमेंट नहीं करवा पाए. इसलिए दलित एजेंडा 2 लेकर आना पड़ा. दिग्विजयसिंह ने पवित्र मन से लागू किया था. अधिकारियों की चूक हुई और इस कारण हमारी सरकार नहीं बन पाई.

13 जनवरी 2027 को जारी होगा भोपाल डिक्लेरेशन 2

पूर्व सीएम और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भोपाल डिक्लेरेशन दलित एजेंडा नहीं था. अनुसूचित जाति के साथ अनुसूचित जनजाति के लिए भी था. इमरजेंसी के साथ एससी-एसटी के लोगों को गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप दिए गए. अब समय आ गया है जेन जी से भी चर्चा करने की जरूरत है. युवाओं से सुझाव लेकर यूथ पॉलिसी बनाना चाहिए. 2002-03 में
डिप्लोमा और डिग्री होल्डर को बिना टेंडर काम दिया. डिक्लेरेशन 02 ,13 जनवरी 2027 को जारी होगा.

सरकार को कम समय मिला था

पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के दलित एंजेंडा के फेल होने को लेकर दिग्विजय सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार को समय कम मिला था. डेढ़ साल कम ही होता है. कई विषयों में लाभ मिला
लेकिन सरकारी जमीनों पर दबंगों का कब्जा था. दबंगों को हटाकर गरीबों को पट्टा दिए गए थे. ग्रामीण क्षेत्रों में नुकसान हुआ था. सरकार जाने के बाद कई के पट्टे कैंसिल हुए. कमलनाथ सरकार ने वापस पट्टा दिलाने का अभियान चलाया. अनुसूचित जाति या जनजाति का मुख्यमंत्री बनता है तो मुझे प्रसन्नता होगी.

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