Deputy Collector Rape Case Bail: दुष्कर्म के गंभीर आरोप में पिछले करीब पांच महीने से जेल में बंद डिप्टी कलेक्टर को आखिरकार हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर को जमानत देने का आदेश दिया है. यह जमानत उन्हें गिरफ्तारी के 149वें दिन मिली है.
50 हजार के निजी मुचलके पर मिली जमानत
कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश सुनाया है. गौरतलब है कि अरविंद माहौर के खिलाफ मुरैना जिले के सिविल लाइन थाने में 3 जून 2026 को एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था.
गिरफ्तारी के बाद से ही वह न्यायिक हिरासत में थे और जमानत के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे. निचली अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. बचाव पक्ष की दलील सुनने के बाद हाई कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत देने का फैसला किया. (Deputy Collector Arvind Mahaur Bail)
क्या है पूरा मामला ?
मिली जानकारी के मुताबिक, जानकारी के अनुसार, मुरैना की रहने वाली 32 वर्षीय युवती ने सिविल लाइन थाना पुलिस में दर्ज शिकायत में बताया कि वर्ष 2025 की शुरुआत में उसकी पहचान फेसबुक के माध्यम से अरविंद माहौर से हुई थी. उस समय माहौर सबलगढ़ में एसडीएम के पद पर पदस्थ थे. दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और बाद में मुलाकातों का सिलसिला शुरू हुआ.
पीड़िता का आरोप है कि अधिकारी ने उससे शादी करने का वादा किया और इसी भरोसे पर कई बार शारीरिक संबंध बनाए. शिकायत में कहा गया है कि 30 मार्च 2025 को उसे घूमाने के बहाने मुरैना रेस्ट हाउस के पीछे ले जाकर दुष्कर्म किया गया. इसके बाद सरकारी आवास और ग्वालियर स्थित एक फ्लैट में भी कई बार उसका शोषण किया गया.
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युवती ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी अधिकारी ने शादी के बदले पांच करोड़ रुपये नकद और एक माह के लिए युवती को किसी अन्य व्यक्ति के साथ भेजने जैसी आपत्तिजनक मांग की थी. शिकायत में मोबाइल फोन में मौजूद कुछ वीडियो और अन्य साक्ष्यों का भी उल्लेख किया गया है.
