Morena News: रामपुरकला थाने में ट्रॉली विवाद को लेकर घंटों चली पंचायत, SP के निर्देशों पर भी नहीं लौटी ट्रॉली

Morena News: पीड़ित ने बताया कि पहले थाना पुलिस ने उसकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की. बाद में पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन ट्रॉली अब तक वापस नहीं मिल सकी. लगातार जनसुनवाई में शिकायत करने के बाद एसपी के निर्देश पर दोनों पक्षों को मंगलवार को रामपुरकला थाने बुलाया गया.
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रामपुरकला थाने में लगी पंचायत

इनपुट-मनोज शर्मा

Morena News: जिले के रामपुरकला थाना परिसर में उस समय पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई, जब गुंडा सूची में दर्ज एक बदमाश ने थाने में ही पंचायत बुलाकर विवाद सुलझाने का प्रयास किया. मामला करीब डेढ़ वर्ष पहले जबरन ले जाई गई ट्रैक्टर-ट्रॉली को वापस दिलाने से जुड़ा है.

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, रामपुरकला थाना क्षेत्र के निवासी सोनू ने आरोप लगाया कि गुंडा सूची में शामिल राजेंद्र उर्फ बड़े कुशवाह ने डेढ़ साल पहले परिचय का फायदा उठाकर उसकी ट्रैक्टर-ट्रॉली ले ली थी. बाद में ट्रॉली लौटाने से इनकार कर दिया. पीड़ित का आरोप है कि 8 मार्च को ट्रॉली वापस लेने पहुंचने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसकी गर्भवती पत्नी के साथ भी अभद्रता व मारपीट की गई, जिससे समय पूर्व प्रसव हो गया.

ट्रॉली अब तक गायब

पीड़ित ने बताया कि पहले थाना पुलिस ने उसकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की. बाद में पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन ट्रॉली अब तक वापस नहीं मिल सकी. लगातार जनसुनवाई में शिकायत करने के बाद एसपी के निर्देश पर दोनों पक्षों को मंगलवार को रामपुरकला थाने बुलाया गया.

थाने में बैठी पंचायत

थाने में आरोपी अपने समर्थकों और गांव के लोगों के साथ पहुंचा, जहां थाना परिसर में ही पंचायत शुरू हो गई. पीड़ित का आरोप है कि पंचायत के दौरान उससे बच्चों की कसम तक खिलवाई गई और समझौते का दबाव बनाया गया. इस पूरे घटनाक्रम से थाना परिसर में कानून व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए.

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ट्रॉली आते ही उसे मालिक को सौंप दिया जाएगा

वहीं थाना प्रभारी रामकुमार वर्मा का कहना है कि एसपी के निर्देश पर दोनों पक्षों और गांव के पंचों को बुलाकर बातचीत कराई गई है. आरोपी से ट्रॉली लाने के लिए कहा गया है, ट्रॉली आते ही उसे उसके मालिक को सौंप दिया जाएगा. गौरतलब है कि हाल ही में पुलिस अधीक्षक ने सभी थाना प्रभारियों को अपराधियों और दलालों को थानों में महत्व नहीं देने के निर्देश जारी किए थे. इसके बावजूद गुंडा सूची में शामिल बदमाश की मौजूदगी में थाने में पंचायत होने से पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

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