MP News: डकैत रामबाबू गड़रिया को भाई बताने के बाद प्रीतम लोधी का यू-टर्न, कहा- किसी की भावनाएं आहत करना उद्देश्य नहीं था
डकैत रामबाबू गड़रिया पर दिए बयान के बाद प्रीतम सिंह लोधी ने खेद जताया.
MP News: चंबल के कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया को अपना सुख-दुख का साथी बताने के बाद शिवपुरी से बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी ने यू टर्न ले लिया है. रामबाबू गड़रिया की फोटो पर माला चढ़ाने और उसे भाई बताने के बाद विवाद खड़ा हो गया है. इस पर गुर्जर समाज ने काफी रोष व्यक्त किया था. विवाद के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करके प्रीतम लोधी ने खेद जताया है. उन्होंने कहा कि किसी की भावना को आहत करना मेरा उद्देश्य नहीं था.
‘मैं सभी समाज के लोगों का सम्मान करता हूं’
बीजेपी विधायक ने कहा, ‘मैं कुछ दिन पहले देवी अहिल्याबाई होल्कर जयंती पर बघेल समाज के कार्यक्रम में गया था. मैं हर समाज के लोगों का सम्मान करता हूं. सभी समाज के लोगों की पूजा करता हूं. कार्यक्रम में मेरे द्वारा कहे गए किसी शब्द से अगर किसी को ठेस पहुंची हो तो मैं उसके लिए हृदय से खेद प्रकट करता हूं. मेरा उद्देश्य किसी की भावना को आहत करना नहीं था. ‘
क्या है पूरा मामला?
दरअसल कुछ दिन पहले शिवपुरी से बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी देवी अहिल्याबाई होल्कर जयंती के मौके पर कार्यक्रम में गए थे. इस दौरान उन्होंने अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति पर माल्यार्पण करने के बाद बगल में रखी कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर भी माला चढ़ाई और डकैत की जमकर तारीफ की. विधायक ने कहा कि मैं भाग्यशाली हूं जो रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर माला चढ़ाने का मौका मिल रहा है. लोधी ने कहा कि रामबाबू गड़रिया गलत आदमी नहीं थे हालातों के कारण उन्होंने ये रास्ता चुना. मेरी उनसे जेल और जंगल में भी मुलाकात हुई थी. जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया.
3 बार एनकाउंटर में मारे जाने का दावा
रामबाबू गड़रिया ग्वालियर-चंबल का कुख्यात डकैत था. गड़रिया पर हत्या, लूट डकैती समेत 100 से ज्यादा मामले दर्ज थे. रामबाबू गड़रिया ने साल 2004 में नरसंहार किया करते हुए ग्वालियर के भंवरपुरा में 13 लोगों को लाइन में खड़ा करके एक साथ मौत के घाट उतार दिया था. ये सभी लोग गुर्जर समाज के थे.
खास बात ये है कि पुलिस ने रामबाबू गड़रिया को तीन बार एनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया था. 1999 में पुलिस ने रामबाबू गड़रिया को एनकाउंटर ढेर करने का दावा किया था. इतना ही नहीं शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया. एनकाउंटर करने वाले अधिकारियों को सरकार से ईनाम भी मिला. लेकिन बाद ये एनकाउंटर फर्जी निकला. इसके बाद फिर 2007 में पुलिस ने बताया था कि गड़रिया को एनकाउंटर में मार दिया गया. लेकिन गड़रिया के परिजनों को पुलिस के इस एनकाउंटर पर भी शक है.
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