MP News: सीधी में जिंदा आदिवासी को कागजों में किया मृत घोषित, एक साल से दफ्तरों के चक्कर काट रहा विकलांग बाबूलाल कोल
विकलांग बाबूलाल कोल
रिपोर्ट – शरद, सीधी
MP News: मध्य प्रदेश के सीधी जिले से प्रशासनिक लापरवाही का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक विकलांग आदिवासी युवक बाबूलाल कोल को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया. हालत यह है कि जिंदा बाबूलाल पिछले एक साल से खुद को जीवित साबित करने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है. मामला तब उजागर हुआ जब उसकी पेंशन और राशन बंद हो गया. जानकारी के अनुसार, जीवित बाबूलाल कोल को समग्र आईडी में मृत दर्ज कर दिया गया, जिसके कारण वह सरकार की तमाम योजनाओं से वंचित हो गया है.
कलेक्टर ने दिए कार्रवाई के आदेश
मामले की शिकायत सामने आने के बाद नवागत कलेक्टर ने जनपद पंचायत के सीईओ की एक वेतन वृद्धि रोकने के साथ ग्राम रोजगार सहायक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं. हालांकि पीड़ित परिवार इस कार्रवाई को नाकाफी मान रहा है. शिकायत के बावजूद अब तक बाबूलाल को राशन और पेंशन का लाभ नहीं मिल पाया है. बड़ी प्रशासनिक लापरवाही के चलते बाबूलाल को जीते-जी कागजों में मृत घोषित कर दिया गया, जिसके बाद अब जनपद सीईओ भी अपने बचाव में जुट गए हैं. पूरा मामला सीधी जनपद क्षेत्र की मोहनिया ग्राम पंचायत का बताया जा रहा है.
गरीबी और बदहाली में गुजर रहा जीवन
बाबूलाल कोल की स्थिति बेहद दयनीय है. उसके सिर पर पक्की छत तक नहीं है और खाने के लिए अनाज का भी संकट बना हुआ है. वह एक कच्चे मकान में किसी तरह गुजारा कर रहा है, जहां बरसात के दिनों में पानी टपकता है. बाबूलाल के माता-पिता भी जीवित हैं, लेकिन उन्हें भी वृद्धावस्था पेंशन से वंचित कर दिया गया है. पीड़ित बाबूलाल के पिता ने बताया कि शिकायत करने के कई दिन बाद भी किसी प्रकार की सुनवाई नहीं हुई और ना ही किसी योजना का लाभ अब तक मिला है. उन्होंने बताया कि जब उनके बेटे को पता चला कि उसे सरकारी कागजों में मृत घोषित कर दिया गया है, तो उसने गुस्से में वह कागज कलेक्ट्रेट में ही फाड़कर फेंक दिया था.
कांग्रेस जिला अध्यक्ष पहुंचे मदद के लिए
वहीं बाबूलाल ने कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी पूरी पीड़ा सुनाई, लेकिन ना तो प्रशासन का कोई अधिकारी उसके घर पहुंचा और ना ही कोई सत्ताधारी नेता. इसी बीच जब जिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्ञान सिंह चौहान को मामले की जानकारी मिली तो वे राशन, सब्जी और आर्थिक मदद लेकर बाबूलाल के घर पहुंचे. वहां मौजूद लोगों ने कहा कि प्रशासन ने इस आदिवासी बाबूलाल को मृत घोषित कर दिया है, तो अब यह सहायता उसे कैसे दी जाएगी.
इसके बाद कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने बाबूलाल, उसकी माता और पिता से मुलाकात की और भरोसा दिलाया कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता, तब तक उनकी लड़ाई लड़ी जाएगी और परिवार के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था भी की जाएगी.
प्रशासन और नेताओं की भूमिका पर नजर
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस पूरे मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है. साथ ही लोगों की नजर इस बात पर भी टिकी है कि क्या सत्ताधारी दल के नेता भी इस पीड़ित आदिवासी परिवार के घर पहुंचते हैं या नहीं.
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