Indore Elevated Corridor: इंदौर को ट्रैफिक के झंझट से मिलेगी मुक्ति! 350 करोड़ में बनेगा 6.5 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर
इंदौर एलिवेटेड कॉरिडोर
Indore Elevated Corridor: इंदौर शहर को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने और यातायात व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है. शहर में 6.5 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा. यह महत्वाकांक्षी परियोजना करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगी और खास बात यह है कि यह पुरानी मंजूर डिजाइन के अनुसार ही आगे बढ़ेगी. फिलहाल प्रोजेक्ट के तहत मिट्टी की टेस्टिंग का काम जारी है, ताकि निर्माण कार्य में किसी भी तरह की तकनीकी खामी न रहे.
विकास कार्यों को लेकर हुई समीक्षा
इंदौर में चल रहे और प्रस्तावित विकास कार्यों की समीक्षा को लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में एक अहम बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में शहर के विकास से जुड़े तमाम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई. बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
ट्रैफिक जाम से मिलेगा छुटकारा
बैठक के दौरान अधिकारियों ने एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना की प्रगति की जानकारी दी. बताया गया कि यह कॉरिडोर शहर के प्रमुख और व्यस्त मार्गों को जोड़ेगा, जिससे रोजाना लाखों वाहन चालकों को सीधा फायदा मिलेगा. ट्रैफिक का दबाव कम होगा और यात्रा का समय भी काफी घटेगा. मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना को समय-सीमा में और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए.
मंत्री ने कहा कि इंदौर तेजी से विकसित हो रहा है और आने वाले वर्षों में ट्रैफिक का दबाव और बढ़ेगा. ऐसे में एलिवेटेड कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट शहर की जरूरत हैं. उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि निर्माण के दौरान आम जनता को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए वैकल्पिक यातायात व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की जाएं.
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विकास में मील का पत्थर साबित होगा
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि मिट्टी की टेस्टिंग रिपोर्ट आने के बाद निर्माण कार्य को और गति दी जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि सभी तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी तरह की संरचनात्मक समस्या न आए. कुल मिलाकर, 6.5 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर सरकार और प्रशासन पूरी तरह गंभीर नजर आ रहा है. यदि तय समय पर यह परियोजना पूरी होती है, तो यह इंदौर के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी और शहर को एक नई रफ्तार मिलेगी.