Indore Water Crisis: इंदौर दूषित पानी मामले में आज HC में सुनवाई, कोर्ट प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट की मांग कर सकता है
Indore Water Crisis: इस मामले की पिछली सुनवाई 20 जनवरी को हुई थी, जो करीब डेढ़ घंटे तक चली थी. उस दौरान शासन की ओर से घटना का कारण पुलिस चौकी के टॉयलेट को बताया गया था. शासन का कहना था कि पुलिस चौकी में बने शौचालय से लीकेज के चलते पानी दूषित हुआ और यह दूषित पानी सप्लाई लाइन में मिल गया
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ
Indore Water Crisis: इंदौर हाईकोर्ट में आज भागीरथपुरा मामले की एक बार फिर अहम सुनवाई होने जा रही है. दूषित पानी पीने से अब तक 28 लोगों की मौत के इस गंभीर मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है. आज की सुनवाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने शासन के तर्कों पर कड़े सवाल खड़े किए थे.
हाई कोर्ट ने प्रशासन को लगाई थी फटकार
- गौरतलब है कि इस मामले की पिछली सुनवाई 20 जनवरी को हुई थी, जो करीब डेढ़ घंटे तक चली थी. उस दौरान शासन की ओर से घटना का कारण पुलिस चौकी के टॉयलेट को बताया गया था. शासन का कहना था कि पुलिस चौकी में बने शौचालय से लीकेज के चलते पानी दूषित हुआ और यह दूषित पानी सप्लाई लाइन में मिल गया.
- हालांकि, इस दलील पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सवाल किया था कि क्या मात्र एक टॉयलेट से पानी इतना ज्यादा दूषित हो सकता है कि उससे 28 लोगों की जान चली जाए.
- कोर्ट ने पिछली सुनवाई में यह भी कहा था कि यदि इतनी बड़ी संख्या में मौतें हुई हैं, तो इसके पीछे लापरवाही की गहरी वजहें हो सकती हैं. कोर्ट ने साफ संकेत दिए थे कि मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच जरूरी है. साथ ही, जल प्रदाय व्यवस्था, पाइपलाइन की स्थिति, मेंटेनेंस और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे.
शिकायतों को नजरअंदाज किया गया- रहवासी
- भागीरथपुरा क्षेत्र के हालात को लेकर स्थानीय लोगों में अब भी गुस्सा और डर दोनों है. पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्हें अब तक न तो सही जानकारी दी गई है और न ही जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई होती दिख रही है.
- लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद दूषित पानी की समस्या को नजरअंदाज किया गया, जिसका नतीजा इतना बड़ा हादसा बनकर सामने आया.
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न्यायालय प्रशासन से ठोस जवाब मांग सकता है
- आज की सुनवाई में हाई कोर्ट शासन से विस्तृत रिपोर्ट और ठोस जवाब मांग सकता है. साथ ही, यह भी उम्मीद की जा रही है कि कोर्ट मृतकों के परिजनों को मुआवजा, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस दिशा-निर्देश दे सकता है.
- भागीरथपुरा मामला अब सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि पूरे शहर की जल व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन चुका है. हाई कोर्ट की आज की सुनवाई से पीड़ित परिवारों को न्याय की उम्मीद है और पूरे प्रदेश की नजरें इस मामले पर टिकी हुई हैं.