MP News: खरगोन में तीन चरणों में आकार ले रहा ‘अहिल्या लोक’, झूला पुल होगा आस्था को जोड़ने वाला प्रमुख केंद्र
सांकेतिक तस्वीर
MP News: देवी अहिल्याबाई होलकर ने सदियों पहले जिन मंदिरों, घाटों और धार्मिकस्थलों के माध्यम से भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक चेतना को नया स्वरूप दिया था, आज उसी विरासत को आधुनिक रूप से एक नया आकार देते हुए फिर से संजोने और जोड़ने की तैयारी ज़ोर-शोर से चल रही है.
झूला पुल से मिलेगी नई पहचान
उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 से पहले प्रस्तावित ‘अहिल्या लोक’ परियोजना अब केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि महेश्वर की आध्यात्मिक पहचान बन गई है. इसके माध्यम से सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को नया आयाम देने की पूरी कोशिश की जा रही है. अहिल्या लोक का निर्माण कार्य तीन चरणों में होना है. इसके दूसरे चरण में ज्वालेश्वर महादेव और कालेश्वर महादेव मंदिरों के बीच झूला पुल प्रस्तावित किया गया है. यह पुल सिर्फ दो मंदिरों को नहीं जोड़ेगा, बल्कि इससे आस्था और विरासत को भी नया आकार और एक नई पहचान मिलेगी.
तीन चरणों में पूरी होगी परियोजना
परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के इंजीनियर निलेश शेंग्ले ने बताया कि 22 माह की समयसीमा में यह परियोजना तीन चरणों में विकसित की जाएगी. पहले चरण में भवन और म्यूजियम के निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, वहीं इसका पूरा काम दूसरे और तीसरे चरण में दिखाई देगा, जहां महेश्वर के ऐतिहासिक स्थलों और जीवंत परंपराओं को एक बार फिर सांस्कृतिक धरोहर पथ में बदलने तैयारी की जा रही है.
श्रद्धालु को मिलेगा नया अनुभव
अहिल्या लोक मध्य प्रदेश की नहीं देशभर में चर्चित और संभावित पहचान बनने जा रहा है. ज्वालेश्वर महादेव और कालेश्वर महादेव मंदिरों के बीच प्रस्तावित झूला पुल केवल आवागमन का केंद्र नहीं होगा, बल्कि श्रद्धा और पर्यटन का एक नया अनुभव का प्रतीक भी बनेगा. हाउसिंग बोर्ड का इस परियोजना में झूला पुल की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यदि इस योजना को धरातल पर उतारा जाएगा तो श्रद्धालु और यहां आने वाले पर्यटक नर्मदा के दोनों तटाें पर बने आस्था के प्रमुख केंद्रों का एक साथ आनंद ले सकेंगे.
ये भी पढे़ं- MP News: सिंहस्थ 2028 की तैयारियां शुरू, डिंडोरी पुलिस के जवानों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण