Barwani News: कलेक्टर साहब! 22 साल से झोपड़ी में चल रहा स्कूल, शिकायत के बावजूद पानी को तरस रहे बच्चे

Barwani News: संकुल क्षेत्र दोल्जर आंबा में दो प्राथमिक स्कूल झोपड़ी में चल रहे हैं. इन स्कूलों में बच्चों को पक्के भवन के बजाय झोपड़ी में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है. शिक्षिका ने बताया कि स्कूल भवन की समस्या को लेकर उन्होंने कई बार मौखिक और लिखित आवेदन देकर उच्च अधिकारियों को जानकारी दी है. इसके बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है.
Barwani News

Barwani News/ image source: vistaar news input

Barwani News: बड़वानी जिले के आदिवासी बहुल पानसेमल विकासखंड में शिक्षा की जमीनी हकीकत सामने आई है. यहां ग्राम पंचायत करणपुरा के संकुल क्षेत्र दोल्जर आंबा में दो प्राथमिक स्कूल झोपड़ी में चल रहे हैं. इन स्कूलों में बच्चों को पक्के भवन के बजाय झोपड़ी में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है.

प्राथमिक स्कूल झोपड़ी में संचालित

पानसेमल विधानसभा के ग्राम करणपुरा के मोक्सर फलिया और दोल्जर आंबा के प्राथमिक स्कूल झोपड़ी में संचालित हो रहे हैं. ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल भवन के साथ-साथ बच्चों के लिए पीने के पानी और आने-जाने की सुविधा भी नहीं है. स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क भी पर्याप्त नहीं है.

मोक्सर फलिया की शिक्षिका अनीता डुडवे ने बताया कि वह 2003 से यहां पदस्थ हैं. स्कूल शुरू से ही झोपड़ी में चल रहा है. इस प्राथमिक विद्यालय में सत्र 2025-26 में कुल 23 बच्चे दर्ज हैं.

शिक्षिका कई बार कर चुकी हैं शिकायत

शिक्षिका ने बताया कि स्कूल भवन की समस्या को लेकर उन्होंने कई बार मौखिक और लिखित आवेदन देकर उच्च अधिकारियों को जानकारी दी है. इसके बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है. बारिश के दिनों में काफी दिक्कतें आती हैं, क्योंकि झोपड़ी से जगह-जगह पानी टपकता रहता है और बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते.

दोल्जर आंबा के गांव पटेल संदीप डूडवे ने बताया कि ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को स्कूल भवन की समस्या के बारे में बताया है. लेकिन अभी तक स्कूल भवन का निर्माण नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि गांव के बच्चों का भी सपना है कि वे पढ़-लिखकर अधिकारी बनें और आगे बढ़ें.

कई स्कूल झोपड़ी में चल रहे

डीपीसी सोनालिका अचाले ने बताया कि जिले में एक-दो नहीं, बल्कि कई स्कूल भवन झोपड़ियों में चल रहे हैं. उन्होंने बताया कि भवन के लिए वार्षिक योजना में प्रस्ताव बनाकर 2026-27 के लिए भेज दिया गया है. जिले में लगभग 89 जर्जर भवनों को लेकर प्रस्ताव भेजा गया है. स्वीकृति मिलते ही भवनों पर काम शुरू किया जाएगा. ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल भवन, पेयजल और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की समस्या का जल्द समाधान करे, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण में शिक्षा मिल सके.

ये भी पढ़ें:पुल‍िस ने किया जंतर-मंतर पर 2873 अपराधियों की पहचान का दावा! जांच में खुल गई पोल

ज़रूर पढ़ें