इंदौर: SC पर टिप्पणी से बढ़ा सियासी बवाल, महापौर ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की उठाई मांग

इंदौर: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सुप्रीम कोर्ट को लेकर की गई टिप्पणी अब बड़े राजनीतिक विवाद का रूप लेती जा रही है.
Digvijaya Singh

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह

इंदौर: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सुप्रीम कोर्ट को लेकर की गई टिप्पणी अब बड़े राजनीतिक विवाद का रूप लेती जा रही है. इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस मामले में देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को पत्र लिखकर दिग्विजय सिंह के खिलाफ न्यायालय की अवमानना के तहत कार्रवाई करने की मांग की है.

न्यायपालिका की गरिमा प्रभावित- पुष्यमित्र भार्गव

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अपने पत्र में कहा है कि देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था के संबंध में सार्वजनिक रूप से की गई टिप्पणियां न्यायपालिका की गरिमा और उस पर जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं. उन्होंने सॉलिसिटर जनरल से अनुरोध किया है कि मामले का परीक्षण करते हुए Contempt of Court Act, 1971 की धारा 15(1)(b) के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए.

गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद दिग्विजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर टिप्पणी की थी. उनके बयान के बाद भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और इसे न्यायपालिका पर अनावश्यक एवं आपत्तिजनक टिप्पणी बताया था.

पत्र में पुष्यमित्र भार्गव ने कहा है कि..

अब इंदौर के महापौर द्वारा सीधे सॉलिसिटर जनरल को पत्र लिखे जाने से इस पूरे मामले ने नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है. अपने पत्र में पुष्यमित्र भार्गव ने कहा है कि लोकतंत्र के तीनों स्तंभों में जनता का विश्वास बनाए रखना बेहद आवश्यक है और न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले किसी भी बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. भाजपा इस मामले को न्यायपालिका के सम्मान से जोड़कर देख रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से फिलहाल इस पत्र पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

तुषार मेहता के अगले कदम पर सबकी निगाहें

अब सबकी निगाहें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अगले कदम पर टिकी हैं. यदि इस पत्र पर संज्ञान लिया जाता है तो मामला कानूनी रूप से और आगे बढ़ सकता है. वहीं राज्यसभा चुनाव के बीच शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में नया मुद्दा बन सकता है.

फिलहाल दिग्विजय सिंह की टिप्पणी और उसके बाद महापौर की शिकायत ने मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसके दूरगामी राजनीतिक और कानूनी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं.

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