MP News: 200 करोड़ की शंकराचार्य प्रतिमा पर उठे सवाल, मुख्य स्टील पिलर में झुकाव का दावा, CBI और लोकायुक्त तक पहुंची शिकायत
ओंकारेश्वर आदि शंकराचार्य प्रतिमा
MP News: मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर स्थापित 108 फीट ऊंची आदि गुरु शंकराचार्य की ‘स्टैच्यू ऑफ वननेस’ एक बार फिर विवादों में है. करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस प्रतिमा की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. दावा किया गया है कि जिस मुख्य स्टील पिलर पर पूरी प्रतिमा टिकी हुई है, उसमें तकनीकी खामी और झुकाव सामने आया है. इतना ही नहीं, इस खामी को उजागर करने वाले दो वरिष्ठ अधिकारियों को पद से हटाए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं.
CBI और लोकायुक्त तक पहुंची शिकायत
इस पूरे मामले की शिकायत CBI, मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और लोकायुक्त संगठन तक पहुंच चुकी है. शिकायत तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर बिश्वजीत बनर्जी ने 12 मई को की थी. उनका आरोप है कि लगभग 2300 करोड़ रुपये के एकात्मधाम प्रोजेक्ट में सुरक्षा और तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई है.
शिकायत के अनुसार, प्रतिमा को 140 से 170 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवाओं को सहने के हिसाब से डिजाइन किया गया था. लेकिन तकनीकी विश्लेषण में सामने आया कि मौजूदा स्थिति में यह संरचना 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवा का दबाव भी सुरक्षित तरीके से नहीं झेल पाएगी.
ETABS रिपोर्ट में तकनीकी खामी का दावा
सबसे गंभीर दावा इंटरनेशनल स्ट्रक्चरल एनालिसिस सॉफ्टवेयर ETABS की रिपोर्ट को लेकर किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिमा के मुख्य आंतरिक स्टील पिलर (एलिमेंट नंबर C12) का स्ट्रेस रेशियो 1.244 दर्ज किया गया, जबकि सुरक्षित सीमा 0.85 निर्धारित थी. यानी संरचना पर तय सीमा से लगभग 24 प्रतिशत अधिक दबाव पड़ रहा है, जिससे भविष्य में सुरक्षा संबंधी जोखिम की आशंका जताई गई है.
अधिकारियों को हटाने के भी आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने करीब छह महीने तक लगातार मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम और निर्माण एजेंसी एलएंडटी को लिखित रूप से तकनीकी खामी और संभावित खतरे के बारे में चेताया, लेकिन समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए गए. इसके उलट, फील्ड डायरेक्टर बिश्वजीत बनर्जी और प्रोजेक्ट डायरेक्टर कर्नल अनुपम गुप्ता को ही उनके पद से हटा दिया गया.
लोकायुक्त ने मांगे दस्तावेज
मामले ने अब कानूनी मोड़ भी ले लिया है. लोकायुक्त संगठन ने शिकायतकर्ता को दस्तावेजों और तकनीकी रिकॉर्ड के साथ उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है. शिकायत की जांच इंदौर स्थित लोकायुक्त कार्यालय में की जा रही है. हालांकि, 7 जुलाई को प्रस्तावित सुनवाई किसी कारणवश नहीं हो सकी.
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी देश की इस प्रतिष्ठित प्रतिमा की संरचनात्मक सुरक्षा पर उठे आरोपों की सच्चाई क्या है? क्या तकनीकी खामियों को समय रहते नजरअंदाज किया गया? और यदि शिकायतें सही थीं, तो कार्रवाई सुधार पर हुई या शिकायत करने वालों पर? इन सभी सवालों के जवाब अब जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से सामने आने की उम्मीद है.
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