नरसिंहपुर के नोनी गांव में 40 साल बाद भी सड़क नदारद! मरीज को खाट पर ले जाने को मजबूर, अस्पताल पहुंचने पर हुई मौत
नरसिंहपुर: ग्रामीण मरीज को खाट पर ले जाने को मजबूर
Narsinghpur News (पीयूष कुमार दीक्षित की रिपोर्ट): नरसिंहपुर जिले में दर्जनों ऐसे ग्रामीण इलाके हैं, जहां आज तक पक्की सड़क नहीं बन पाई है. बारिश के दिनों में तो इनकी जिंदगी भगवान भरोसे ही हो जाती है. ऐसा ही एक गांव गोटेगांव जनपद की ग्राम पंचायत नोनी का भागड़ टोला भी है. जहां के निवासी पिछले 40 साल से डेढ किमी के कच्चे रास्ते के पक्कीकरण की मांग कर रहे हैं, लेकिन यह पूरी नहीं हो रही है. इसके कारण गंभीर रूप से बीमारों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है.
अस्पताल पहुंचने पर मरीज की हुई मौत
ताजा घटनाक्रम गांव के कैंसर से पीड़ित ग्रामीण का है. जिनकी तबीयत बिगड़ने पर परिजन व ग्रामीण उन्हें डेढ़ किमी दूर कच्चे रास्ते से खाट पर लिटाकर एंबुलेंस तक पहुंचे. मरीज को जैसे-तैसे जबलपुर के अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो गई. चिकित्सकों के अनुसार मरीज यदि आधा-एक घंटे पहले आ जाता तो उसकी जांच बच सकती थी. इस दर्दनाक हादसे के बाद आक्रोशित पिछले चार दिन से लगातार एसडीएम, जनपद सीईओ से लेकर विधायक को सड़क के लिए लगातार ज्ञापन दे रहे हैं.
क्या है पूरा मामला?
भागड़ टोला के ग्रामीण अभिषेक ने बताया कि उनके परिवार के 38-40 वर्षीय भूपत श्रीपाल को गाल में कैंसर हो गया था. उनकी दवाएं चल रहीं थी. बीती 11 जुलाई को अचानक गाल से खून गिरने लगा. हालत बिगड़ने पर उन्होंने एंबुलेंस भी बुलाई लेकिन वह डेढ़ किमी पहले चंदली गांव तक ही रुक गई. वजह भागड़ टोला तक नमी व कच्चे रास्ते पर एंबुलेंस नहीं जा सकती थी. अभिषेक के अनुसार सरपंच-सचिव से बार-बार आग्रह भी किया लेकिन उन्होंने भी कोई मदद नहीं की.
मरीज की बिगड़ती हालत को देखते हुए ग्रामीणों ने परिजनों के साथ मरीज को खाट पर लिटाया और पैदल ही उसे लेकर चंदली गांव की मुख्य सड़क पर खड़ी एंबुलेंस तक पहुंचाया. हालांकि मरीज जब जबलपुर पहुंचा तो चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया. एक लाइन में कहा कि ‘यदि मरीज एक घंटे पहले आ जाता तो उसकी जान बच सकती थी. कैंसर पीड़ित की मौत की सूचना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया. शव को गांव लाकर अंत्येष्टि आदि के बाद से सभी अब दफ्तरों के चक्कर लगा रहे है, ताकि कच्ची, कीचड्युक्त सड़क के कारण अन्य बीमारों के साथ ऐसी घटना न हो. अभिषेक के अनुसार उनके घर में भी मां बीमार है. बारिश में मरीज को अस्पताल पहुंचाना मुमकिन नहीं होगा.
तीन दिन पहले SDM को ज्ञापन दिया
कैंसर पीड़ित भूपत श्रीपाल की मौत के तीन दिन बाद यानी 14 जुलाई को ग्रामीण एकजुट होकर एसडीएम संघमित्रा गौतम के पास पहुंचे. गांव के हालातों के बारे में बताते हुए एक ज्ञापन भी दिया. जिसमें बताया कि उनके भागड़ टोला गांव में आवाजाही के लिए रास्ता नहीं है. गांव के बाजू से एक नाला है, जहां से सभी ग्रामीण आवाजाही करते हैं. जिसमें बारिष्ठ के समय नाला में बाढ़ आ जाने से कई दिनों तक आवाजाही का रास्ता बंद रहता है. ग्रामीणों को पैदल चंदली गांव तक जाना पड़ता है. यदि कोई व्यक्ति बीमार हो जाए तो चारपाई पर लिटाकर ले जाना ही इकलौता विकल्प है.
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40 सालों से ग्रामीण हो रहे परेशान
स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है. जिससे उनका भविष्य भी प्रभावित हो रहा है. ग्रामीणों के अनुसार वे गांव में पिछले 40 साल से रहवास कर रहे हैं. यहां पर लगभग सभी ग्रामीणों को पीएम आवास का लाभ भी मिला है, लेकिन आवाजाही के लिए पक्का रास्ता भर नहीं है. भागड टोला से चंदनी की दूरी डेढ़ किमी है. यहां तक पहुंचने के लिए पैदल ही जाना पड़ता है.
ग्रामीणों ने समस्या के निराकरण की मांग की. ज्ञापन देने वालों में अभिषेक, छोटेलाल, रघुवीर, प्रेमलाल, सुनील, विनोद, मानक, पप्पू आदि शामिल थे. इसके बाद 15 जुलाई को ग्रामीणों ने जनपद सीईओ और गोटेगांव विधायक को भी ज्ञापन दिए. ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं किया जा रहा है. इस संबंध में गोटेगांव विधायक महेंद्र नागेश से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ रहा.