केन-बेतवा परियोजना पर बवाल! चिता पर लेटे प्रदर्शनकारी, 10वें दिन आमरण अनशन जारी
Ken Betwa Pariyojana Vivad: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं, जिसकी चर्चा देशभर में हो रही है. तो वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में पिछले 10 दिनों से एक शख्स आमरण अनशन पर बैठा हुआ है. जिसकी चर्चा शायद ही आपने सुनी होगी. अनशन करने वाले का नाम अमित भटनागर है. जो पिछले 10 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं. यह आंदोलन और प्रदर्शन केन बेतवा लिंक परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं और विस्थापितों की मांगों को लेकर हो रहा है.
बुंदेलखंड का छतरपुर कई वजहों से हमेशा ही चर्चा में बना रहा है. लेकिन इस बार चर्चा में रहने की वजह यहां पर चल रहा चिता आंदोलन है. जो पिछले कई दिनों से लगातार जारी है. बारिश आंधी में भी यह आंदोलन रुका नहीं है. अब सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपने हक और पहचान की लड़ाई का प्रतीक बनता जा रहा है. चलिए हम आपको विरोध करने के पीछे की वजह और प्रदर्शनकारियों की मांगों के बारे में विस्तार से बताते हैं.
सबसे पहले जान लीजिए विरोध हो कहां रहा है?
अमित भटनागर और उनके साथ कई गांवों के लोग जो केन बेतवा लिंक परियोजना के कारण प्रभावित हुए हैं. वे लोग पन्ना और छतरपुर जिले में उसी जगह पर विरोध कर रहे हैं जहां पर इस योजना के कारण सीधा असर होगा. केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत 24 गांवों का विस्थापन प्रस्तावित है. इनमें से 8 गांव डूब क्षेत्र में आते हैं, जहां सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है.
प्रदर्शन करने वाले ग्रामीणों की कई शिकायतें इस परियोजना को लेकर हैं. उनका सबसे पहला आरोप तो यही है कि सरकार ने मनमाने तरीके से मुआवजा दिया है. जिनको असल मायने में मुआवजा मिलना चाहिए था. उनको कुछ भी नहीं मिला है. जबकि कुछ लोगों को कई गुना दिया गया है. सीधे तौर पर कहें तो मुआवजा राशि में कई तरह की विसंगतियां हैं. इसी केा लेकर पीड़ितों और प्रशासन के बीच संग्राम छिड़ा हुआ है.
शुरुआत से ही हो रहा परियोजना का विरोध
देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है केन बेतवा परियोजना, जब से इस योजना का काम शुरू हुआ है. तभी से ही इसका विरोध हो रहा है. लगभग 4 चारों से समय-समय पर ग्रामीण विरोध करते आ रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ महीनों से यह विरोध तेज हो गया है. क्योंकि इस बार बांध चालू हो जाने के कारण कई गांव डूब जाएंगे. इससे उन गांवों में रहने वाले लोगों को विस्थापित किया गया. लेकिन विस्थापित होने के लिए सरकार की तरफ से जो मुआवजा दिया गया. वह बहुत कम है. लोगों का कहना है कि इतने पैसों में दूसरी जगह घर बना पाना संभव ही नहीं है. आंदोलन का नेतृत्व किसान नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर कर रहे हैं.
किन मांगों को लेकर हो रहा विरोध?
प्रदर्शन कर रहे लोगों का सीधे तौर पर प्रशासन और सरकार पर आरोप है कि डूब क्षेत्र में आने वाले परिवारों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला, जबकि कई अपात्र लोगों को अधिक राशि दी गई. आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में प्रत्येक विस्थापित परिवार को तीन एकड़ जमीन, कट-ऑफ डेट को वर्ष 2026 तक बढ़ाया जाए. इसके साथ ही इस परियोजना में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच कराई जाए.
इन्हीं मांगों को लेकर अमित भटनागर आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं. पिछले 10 दिनों में उनका 6 किलो से ज्यादा वजन गिर चुका है. आलम यह है कि वहां मौजूद सैकड़ों प्रदर्शनकारियों के घरों में भी अब चूल्हा नहीं जल रहा है. लंबे समय से पानी में खड़े होकर प्रदर्शन करने के कारण कई लोगों का स्वास्थ्य भी अब साथ नहीं दे रहा है. इसके बाद भी सरकार की तरफ से अब तक कोई उनकी खबर लेने नहीं पहुंचा है.