MP News: आज आसमान में दिखेगा ‘ब्लड मून’, पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण का अद्भुत नजारा, जानिए एमपी में ग्रहण का समय
चंद्र ग्रहण (सांकेतिक तस्वीर)
MP News: होली की शाम इस बार सिर्फ धरती ही नहीं, बल्कि आसमान भी रंगों से सजा नजर आएगा. 3 मार्च, मंगलवार को पूर्णिमा के अवसर पर चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना घटित होगी. भारत में यह ग्रहण ग्रस्तोदय के रूप में दिखाई देगा, अर्थात जब चंद्रमा क्षितिज पर उदित होगा, उसी समय उस पर ग्रहण लगा हुआ रहेगा. हालांकि देश में पूर्ण चंद्रग्रहण नहीं, बल्कि इसका अंतिम आंशिक चरण ही कुछ समय के लिए देखा जा सकेगा.
एमपी के शहरों में कब दिखेगा ग्रहण
मध्य प्रदेश में अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय के अनुसार ग्रहण की दृश्यता में अंतर रहेगा. सीधी में चंद्रमा शाम 6:04 बजे उदित होगा, सतना में करीब 6:06 बजे और रीवा में लगभग 6:00 बजे दिखाई देगा. नरसिंहपुर में चंद्रोदय 6:15 बजे, दतिया में 6:18 बजे और शिवपुरी में लगभग 6:30 बजे होगा. विदिशा में चंद्रमा 6:22 बजे, नर्मदापुरम में 6:23 बजे और शाजापुर में करीब 6:25 बजे नजर आएगा.
आगर मालवा में चंद्रोदय लगभग 6:25 से 6:29 बजे के बीच, देवास में 6:30 बजे, नीमच में करीब 6:34 से 6:35 बजे और अलीराजपुर में लगभग 6:36 बजे चंद्रमा दिखाई देगा. जिन शहरों में चंद्रमा पहले उदित होगा वहां ग्रहण का दृश्य कुछ अधिक देर तक देखा जा सकेगा, जबकि पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में इसकी अवधि कम रहेगी.
ग्रहण का समय और भारत में दृश्यता
खगोलीय गणनाओं के मुताबिक आंशिक ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट 07 सेकंड से प्रारंभ होगा. इसके बाद पूर्ण चरण 4 बजकर 34 मिनट 34 सेकंड पर शुरू होकर 5 बजकर 32 मिनट 49 सेकंड तक चलेगा. आंशिक ग्रहण की समाप्ति शाम 6 बजकर 47 मिनट 15 सेकंड पर होगी. चूंकि भारत में चंद्रोदय शाम के समय होगा, इसलिए यहां ग्रहण का अंतिम आंशिक हिस्सा ही दिखाई देगा. जिन जिलों में चंद्रमा पहले उदित होगा, वहां ग्रहण अधिक समय तक देखा जा सकेगा, जबकि पश्चिमी हिस्सों में इसकी अवधि अपेक्षाकृत कम रहेगी.
प्रदेश में कितनी देर दिखेगा ग्रहण
पूर्ण चंद्रग्रहण की कुल अवधि 58 मिनट की रहेगी, लेकिन भारत में इसका अधिकांश भाग चंद्रोदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा. मध्यप्रदेश के पूर्वी जिलों में यह दृश्य लगभग 40 से 45 मिनट तक देखा जा सकता है, जबकि पश्चिमी जिलों में यह अवधि घटकर करीब 10 मिनट रह जाएगी. विशेषज्ञों का कहना है कि चंद्रग्रहण को बिना किसी विशेष उपकरण के नंगी आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है और इसके लिए किसी खास चश्मे की आवश्यकता नहीं होती.
कैसे बनता है ‘ब्लड मून’
विज्ञान संचारक सारिका घारू के अनुसार, इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी की पूर्ण छाया से होकर गुजरेगा. जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है. पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की नीली किरणों को बिखेर देता है और लाल प्रकाश को आगे बढ़ने देता है. यही कारण है कि पूर्ण चंद्रग्रहण के समय चंद्रमा तांबे या गहरे लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे आम बोलचाल में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है.
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