पानी के कारण मायके भाग रहीं महिलाएं, 2 KM दूरी पर सिर्फ एक नल, गंदा इतना कि जानवर भी हो जाएं बीमार

गांव के रहने वाले लल्लू यादव बताते हैं कि लगभग 10 सालों से समस्या बनी हुई है. गांव में लगभग 200 परिवार रहते हैं लेकिन कोई भी हमारी सुध लेने वाला नहीं है.
In Kodhwa village of Mauganj, dozens of families depend on just one house 2 kilometres away.

मऊगंज के कोढ़वा गांव में दर्जनों परिवार 2 किलोमीटर दूर सिर्फ एक घर पर निर्भर हैं.

Mauganj News: क्या आपने कभी सुना है कि सिर्फ पानी की कमी की वजह से हंसते-खेलते परिवार उजड़ रहे हों, मध्यप्रदेश के नवगठित जिले मऊगंज से एक ऐसी हृदयविदारक खबर सामने आ रही है, जहां विकास के तमाम दावों के बीच प्यास, रिश्तों पर भारी पड़ रही है. हनुमना के कोढ़वा गांव में जल संकट इस कदर गहरा गया है कि बहुएं अब ससुराल छोड़ मायके पलायन कर रही हैं.

एक बाल्टी पानी के लिए घंटों बीत जाता है

पूरा मामला मऊगंज के हनुमना विकासखंड के ग्राम कोढ़वा का है. यहां करीब 200 परिवार हैं. गांव में सुबह 4 बजते ही गांव की महिलाएं हाथों में बाल्टियां लेकर पानी की अग्निपरीक्षा देने निकल पड़ती हैं. पथरीला इलाका होने के कारण पाताल में जा चुका जलस्तर अब ग्रामीणों के सब्र का इम्तिहान ले रहा है. आलम यह है कि 2 किलोमीटर के दायरे में महज एक सरकारी नल है, जहां एक बाल्टी भरने में घंटों का समय बीत जाता है.

गांव के रहने वाले लल्लू यादव बताते हैं कि लगभग 10 सालों से समस्या बनी हुई है. गांव में लगभग 200 परिवार रहते हैं लेकिन कोई भी हमारी सुध लेने वाला नहीं है.

जहरीला पानी जानवरों के पीने लायक भी नहीं

सिर्फ एक स्कूल के भरोसे पूरा गांव है. महिलाएं करीब डेढ़ से दो किलोमीटर दूर गदाखुर स्कूल जाती हैं, जहां एक नल ही पूरे इलाके का सहारा है. गांव का तालाब अब सिर्फ नाम का है, जिसका जहरीला पानी जानवरों के पीने लायक भी नहीं बचा. वहीं महिलाएं को वजनी बर्तनों को इतनी दूर ले जाने के कारण शारीरिक समस्याएं हो गई हैं. जबकि गांव के बच्चे स्कूल के बजाय पानी भरने में मदद करते हैं.

प्रशासन के दावों को ठेंगा दिखाती व्यवस्था

पत्नियां पानी की समस्या से तंग आकर ससुराल छोड़ने का फैसला कर रही हैं, तो पुरुष आर्थिक तंगी के कारण सिर्फ सिर झुकाए खड़े रह जाते हैं.

प्रशासन दावा करता है कि हर नल में जल पहुंच रहा है, लेकिन कोढ़वा गांव की व्यवस्थाएं प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही हैं. यहां पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए परिवार टूटने लगे हैं. हालांकि गांव वाले अभी भी इस उम्मीद में हैं कि शायद कोई हुक्मराना या आला अधिकारी उनकी समस्याओं को जल्द ही सुनेगा. अब खतरा इस बाद का है कि अगर समस्या नहीं सुनी गई तो ये गांव पलायन की भेंट चढ़ सकता है.

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