सिस्टम की हालत तंगहाल! मऊगंज में एंबुलेंस नहीं मिली तो ठेले से शव ले गया परिवार
मऊगंज: परिजन ठेले से शव ले गए
MP News: मऊगंज जिले से सामने आई दो दिल दहला देने वाली घटनाओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है. ये सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक ऐसा संवेदनहीन सिस्टम है जो गरीबों के दर्द पर मूकदर्शक बना हुआ है.
घायल को बेड नहीं, जमीन नसीब?
पहली घटना में सड़क हादसे में घायल युवक को मऊगंज सिविल अस्पताल लाया गया, लेकिन यहां इंसानियत तार-तार होती दिखी. युवक को बेड पर लिटाने के बजाय जमीन पर ही छोड़ दिया गया. बताया गया कि अस्पताल में बेड खाली थे, फिर भी “बेडशीट गंदी हो जाएगी” कहकर उसे जमीन पर तड़पने के लिए छोड़ दिया गया. दर्द से कराहते युवक की सुध लेने वाला कोई नहीं था, जबकि जिम्मेदार सिर्फ तमाशा देखते रहे.
शव वाहन नहीं, ठेले पर घर पहुंचा शव?
दूसरी घटना नईगढ़ी क्षेत्र की है, जहां एक महिला तेज रफ्तार पिकअप की चपेट में आ गई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई. लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया.पोस्टमार्टम के बाद शव को घर ले जाने के लिए न एंबुलेंस मिली, न शव वाहन. मजबूर परिवार को हाथ ठेले का सहारा लेना पड़ा. आंसुओं और दर्द के बीच परिजन खुद ही शव को ठेले पर रखकर घर ले गए.
मूकदर्शक बना रहा सिस्टम!
दोनों घटनाएं यह साबित करती हैं कि मऊगंज में स्वास्थ्य व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है. जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता और संवेदनहीनता ने आम जनता का भरोसा तोड़ दिया है. सब कुछ सबके सामने होता रहा, लेकिन सिस्टम चुप्पी साधे रहा.
कार्रवाई पर उठ रहे सवाल?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी और बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है? हर बार नोटिस देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है, लेकिन ठोस कार्रवाई का अभाव बना रहता है. ऐसे में जिम्मेदारों पर कब और कैसे कार्रवाई होगी, यह एक बड़ा प्रश्न बना हुआ है.
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क्या जागेगा सिस्टम?
मऊगंज की ये घटनाएं सिर्फ खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी हैं. अगर अब भी व्यवस्था नहीं सुधरी, तो आने वाले समय में हालात और भयावह हो सकते हैं. जरूरत है तत्काल सुधार और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की, ताकि इंसानियत यूं सड़कों और अस्पतालों में दम न तोड़े.