Morena: 32 साल बाद शनि जयंती-शनि अमावस्या और वट अमावस्या एक साथ, शनि मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

Morena News: मुरैना जिले के शनि मंदिर में शनिवार को आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा. 32 वर्षों बाद शनि जयंती, शनि अमावस्या और वट अमावस्या का दुर्लभ संयोग बनने से देशभर से श्रद्धालु दर्शन करने यहां पहुंचे.
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आस्था का जनसैलाब

Morena News/मनोज शर्मा: मुरैना जिले के त्रेतायुगीन शनि मंदिर पर शनिवार को आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा. 32 वर्षों बाद शनि जयंती, शनि अमावस्या और वट अमावस्या का दुर्लभ संयोग बनने से देशभर से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे. भीषण गर्मी और तपती दुपहरी के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई. शनि पर्वत तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु नंगे पैर करीब 2 किलोमीटर पैदल चलते दिखाई दिए.

सूरज की तपन भी नहीं डिगा पाई आस्था

तपती जमीन से बचने के लिए कई श्रद्धालु पैरों में पानी भरकर पॉलीथिन पहनकर यात्रा करते नजर आए. मंदिर परिसर और शनि पर्वत पर सुबह से ही लंबी कतारें लगी रहीं. प्रशासन के अनुसार सुबह 10 बजे तक करीब 2 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे, जबकि देर शाम तक 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई.

त्रेतायुग से जुड़ी है मान्यता

मंदिर के महंत त्यागी जी महाराज ने बताया कि यह त्रेतायुगीन शनि मंदिर है और मान्यता है कि जब हनुमान जी लंका दहन करने गए थे, तब उन्होंने शनि महाराज को लंका से मुक्त कर यहां शनि पर्वत पर स्थापित किया था. उन्होंने यह भी बताया कि सिंगापुर और पुर्तगाल में स्थापित शनि प्रतिमाओं के लिए पत्थर इसी शनि पर्वत से ले जाए गए थे.

शनि की महादशा ने मुक्ति

श्रद्धालुओं का मानना है कि शनि महाराज के दर्शन और पूजा-अर्चना से शनि की महादशा सहित जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं. यही वजह रही कि मध्यप्रदेश सहित करीब 10 राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचे. श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं. पुलिस, स्वास्थ्य, नगर निगम सहित विभिन्न विभागों के करीब 1400 कर्मचारी मेले में तैनात रहे. वहीं मुंडन संस्कार के लिए प्रशासन द्वारा 500 नाइयों की व्यवस्था की गई है.

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