MP News: हाई कोर्ट के आदेश पर उज्जैन का नवजीवन दवाखाना सील, स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टर्स में बयानबाजी तेज

MP News: मामले को लेकर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार (माधव नगर हॉस्पिटल) ने बताया कि यह कार्रवाई एक पुराने चिकित्सकीय प्रकरण से जुड़ी हुई है, जो वर्तमान में न्यायालय में लंबित है. उन्होंने बताया कि पूर्व में क्लीनिक पर आए एक मरीज, जो लिवर एब्सेस से पीड़ित था और स्मोकर भी था, की मृत्यु हो गई थी
indore high court

इंदौर हाई कोर्ट

MP News: उज्जैन के मक्सी रोड स्थित गणेशपुर क्षेत्र में संचालित नवजीवन दवाखाना को गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सील कर दिया. यह कार्रवाई मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में दर्ज रिट पिटीशन क्रमांक 6526/2024 में पारित आदेश दिनांक 13 अक्टूबर 2025 के परिपालन में की गई. कार्रवाई के दौरान दवाखाने के बाहर “सील बंद” का नोटिस चस्पा किया गया.

दो हॉल में संचालित होता था क्लीनिक

नवजीवन दवाखाना दो हॉल वाला क्लिनिक है, जिसे तीन भागों में विभाजित किया गया है. पहले हिस्से में रिसेप्शन और डॉक्टर के बैठने की व्यवस्था है, जहां दीवारों पर चिकित्सकीय प्रमाण पत्र लगे हुए हैं और अलमारियों में दवाइयां रखी पाई गईं. दूसरे कमरे में मरीजों की जांच के लिए बेड लगा हुआ है, वहीं सामने दीवार पर बनी अलमारी में भी दवाइयां रखी हुई थीं. क्लिनिक के ऊपर ही डॉक्टर का निवास है और बाहर लगे बोर्ड पर “फैमिली फिजिशियन” लिखा हुआ है.

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नोटिस में उल्लेख किया गया है कि डॉ. रंजन त्रिवेदी द्वारा संचालित नवजीवन दवाखाना को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला उज्जैन के आदेश क्रमांक पंजीयन/2026/400 के तहत गठित दल द्वारा सील किया गया है.

पुराने मेडिकल मामले में केस कोर्ट में लंबित

मामले को लेकर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार (माधव नगर हॉस्पिटल) ने बताया कि यह कार्रवाई एक पुराने चिकित्सकीय प्रकरण से जुड़ी हुई है, जो वर्तमान में न्यायालय में लंबित है. उन्होंने बताया कि पूर्व में क्लीनिक पर आए एक मरीज, जो लिवर एब्सेस से पीड़ित था और स्मोकर भी था, की मृत्यु हो गई थी. इस मामले में पोस्टमार्टम सहित सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी की गई थीं और प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है.

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वहीं दूसरी ओर, डॉ. रंजन त्रिवेदी ने स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना के उनका क्लिनिक सील कर दिया गया. उनका दावा है कि उन्हें न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही न्यायालय के आदेश की प्रति उपलब्ध कराई गई. डॉ. त्रिवेदी के अनुसार, मरीज की मृत्यु हार्ट अटैक से हुई थी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही के संकेत नहीं मिले हैं.

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