भीमबेटका गुफाएं ढूंढने वाले डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के नाम पर होगा MP का रातापानी टाइगर रिजर्व, CM मोहन यादव ने किया ऐलान, जानें डिटेल
रातापानी टाइगर रिजर्व का नाम बदला
MP News: मध्य प्रदेश का 8वां टाइगर रिजर्व यानी रातापानी टाइगर रिजर्व अब नए नाम से जाना जाएगा. CM मोहन यादव ने इस टाइगर रिजर्व का नाम भीमबेटका गुफाएं ढूंढने वाले डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के नाम पर करने का ऐलान किया है. उन्होंने यह घोषणा भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में की.
बदल गया रातापानी टाइगर रिजर्व का नाम
मध्य प्रदेश के रातापानी टाइगर रिजर्व का नाम बदल गया है. CM डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान समारोह और राष्ट्रीय संगोष्ठी कार्यक्रम में यह ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि अब रातापानी टाइगर रिजर्व डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के नाम पर होगा. डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने शैल चित्रों के क्षेत्र में बड़ा काम किया है.
‘शैलचित्रों के पितामाह’ कहे जाते हैं डॉ. वाकणकर
डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर को शैलचित्रों का पितामह’ कहा जाता है. वह भारत के महान पुरातत्वविद हैं और उन्होंने ही मध्य प्रदेश के रायसेन में हजारों सालों पुरानी भीमबेटका गुफाएं ढूंढ़ी थीं. उन्होंने यह खोज 1957 में की थी. उनकी खोज और अन्वेषणों की वजह से ही साल 2003 में भीमबेटका विश्व धरोहर बना. इसके अलावा उन्होंने उज्जैन के कायथा और महेश्वर के पास नावड़ातोड़ी के उत्खनन से यह सिद्ध किया कि हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की संस्कृति का विस्तार यहां तक था.
डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर मध्य प्रदेश के रहने वाले थे. उनका जन्म 4 मई 1919 को मालवा क्षेत्र के नीमच कस्बे में हुआ था. उन्होंने मुंबई से कला में स्नातक किया था. इसके बाद उन्होंने इतिहास/प्रागैतिहासिक काल, पुरातत्व और मुद्राशास्त्र को अपना विषय बनाया. 3 अप्रैल 1988 को उनका निधन हो गया.
कहां है रातापानी टाइगर रिजर्व ?
रातापानी टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के रायसेन और सीहोर जिले में है. इसका कुल क्षेत्रफल 1,271.4 वर्ग किलोमीटर है. यह मध्य प्रदेश का 8वां और भारत का 57वां बाघ अभयारण्य है.