‘दिल्ली आइए, बात करनी है…’, मोहन यादव के शपथ ग्रहण के बाद पीएम मोदी का श‍िवराज को फोन, क्‍या हुई थी बात

CM Mohan Yadav Oath: मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपनी किताब अपनापन में कई खुलासे किए हैं. इसमें उन्‍होंने बताया कि कैसे मोहन यादव के शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी ने उन्हें दिल्ली आने के लिए फोन किया था.
साल 2023 के व‍िधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी और श‍िवराज

साल 2023 के व‍िधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी और श‍िवराज

PM Modi’s Delhi Call to Shivraj: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की किताब आ रही है, जिसका नाम अपनापन है. इसको लेकर खूब चर्चा हो रही है. इस किताब में शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने 35 सालों के रिश्‍तों, राजनीतिक सफर और कई ऐसे अनुभवों और फैसलों के बारे में बताया है, जो कभी सामने नहीं आए हैं. यानी कि पर्दे के पीछे की कहानी को शिवराज सिंह चौहान ने लिखा है. इसमें एक चैप्टर मध्यप्रदेश में मोहन यादव को सीएम बनाए जाने के बाद का भी है. जिसके बाद पीएम मोदी का फोन शि‍वराज को आया था और दिल्ली आने का आदेश दिया था.

श‍िवराज स‍िंह चौहान की इस किताब में सबसे ज्यादा चर्चा उस घटना की हो रही है, जब दिसंबर 2023 में मध्य प्रदेश में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ था. इस दौरान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिवराज सिंह चौहान से बातचीत की थी.

उस समय मोहन यादव मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री पद छोड़ चुके थे. किताब के मुताबिक, समारोह खत्म होने के बाद पीएम मोदी उनके पास आए और धीरे से कहा कि शिवराज, समय निकालकर दिल्ली आइए, आपसे कुछ बातें करनी है.

श‍िवराज ने अपनी किताब में क्या लिखा?

शिवराज ने लिखा है कि उस समय उन्हें अंदाजा नहीं था कि आगे उनके लिए क्या योजना बनाई जा रही है. लेकिन, करीब छह महीने बाद, 9 जून 2024 को उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया और कृषि व ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई. तब उन्हें महसूस हुआ कि पीएम मोदी ने शपथ ग्रहण के दिन ही उनके भविष्य को लेकर मन बना लिया था.

मतलब यह कि मध्य प्रदेश की 18 सालों तक कमान संभालने वाले श‍िवराज स‍िंह चौहान का राजनीतिक भविष्‍य क्‍या होगा? इस फैसला पार्टी और पीएम मोदी पहले ही ले चुके थे. बस इंतजार था तो केवल लोकसभा चुनावों का. उस चुनाव में शिवराज सिंह को अपनी पुरानी सीट विदिशा से लोकसभा का चुनाव लड़ाया गया और यहां से जीत के बाद दिल्ली की राजनीति में फ‍िर एक्टिव किया गया.

कैसे हुई थी शिवराज और मोदी की मुलाकात

किताब में सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि दोनों नेताओं के बीच भरोसे और व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र है.शिवराज बताते हैं कि उनकी और मोदी की पहचान 1991-92 की एकता यात्रा से शुरू हुई थी.उसी दौरान दोनों नेताओं के बीच नजदीकियां बढ़ीं और फिर यह रिश्ता संगठन से सरकार तक पहुंचा.

उन्होंने किताब में पीएम मोदी की कार्यशैली, अनुशासन और संकट के समय फैसले लेने की क्षमता का भी जिक्र किया है.शिवराज के अनुसार, मोदी की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ उनकी नीतियां नहीं, बल्कि लोगों का उन पर भरोसा है.

किस घटना के बाद शिवराज ने किताब लिखने का फैसला

रिपोर्ट के मुताबिक, शिवराज ने यह भी बताया कि हाल में हुए पहलगाम हमले के बाद उनके मन में यह किताब लिखने का विचार आया. उस समय पीएम मोदी विदेश दौरे पर थे, लेकिन घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया.इस घटना ने भी शिवराज को प्रभावित किया.

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