कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने भगवान शिव से की RSS की तुलना, बोले- महादेव भी विष पीते हैं और राष्ट्र की रक्षा करते हैं
कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा
Bhopal: प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने RSS की तुलना भगवान शिव से की है. उन्होंने कहा कि महादेव भी विष पीते हैं और राष्ट्र की रक्षा करते हैं. RSS भी विष पीकर राष्ट्र की रक्षा करने में लगा हुआ है. कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने शनिवार को यह बात भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस द्वारा आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में कही. इस दौरान आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत और मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पांडेय भी मौजूद रहे.
कार्यक्रम में संबोधन के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने RSS की तुलना भगवान भोलेनाथ से करते हुए कहा कि संघ भी शिवजी जैसे विष पीकर राष्ट्र रक्षा के काम में लगा हुआ है. समाज के अलग-अलग वर्ग अपने स्तर पर कार्य करने में जुटे हैं. हमें यह आत्मचिंतन करना भी जरूरी है कि हमने राष्ट्र के लिए क्या किया? जन्म किसी भी जाति में हो, पहचान अंततः हिंदू, सनातनी और भारतीय की ही होती है.
कथावाचक प्रदीप मिश्रा संघ की तुलना शिव से कर रहे हैं…
— Saurabh (@sauravyadav1133) January 4, 2026
जितने कथावाचक हैं उनमें 90 फीसदी संघ के समर्थक हैं
इन कथावाचकों के जितने भक्त हैं उनमें 90 फीसदी PDA समाज से हैं…
लड़ाई इसलिए मुश्किल होती जा रही है… pic.twitter.com/dfdx8tJnh8
धर्मांतरण गंभीर षड्यंत्र: पंडित प्रदीप मिश्रा
इस दौरान उन्होंने धर्मांतरण को लेकर कहा कि यह केवल वर्तमान नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करने वाला गंभीर षड्यंत्र है. इससे समाज बचना है और सजग रहना है. ‘ग्रीन महाशिवरात्रि’ जैसे अभियानों को लेकर उन्होंने कहा कि घर-घर मिट्टी के शिवलिंग की पूजा सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण का मजबूत उदाहरण देखने को मिल रहा है. यह एक अच्छी पहल है.
ये भी पढ़ें: 2026 में होगा तीसरा विश्व युद्ध? बाबा वेंगा ने की थी भविष्यवाणी, अमेरिका के वेनेजुएला पर हमले के बाद सताने लगा डर!
एकता ही हमारी पहचान: मोहन भागवत
इस दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बोले कि विविधता के बावजूद एकता ही हमारी पहचान है. बाहरी रूप से हम कुछ अलग दिख सकते हैं, लेकिन राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के स्तर पर हम सभी एक ही हैं. हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि एक स्वभाव है, जो मत, पूजा पद्धति या जीवनशैली के आधार पर झगड़ा नहीं करता. हजारों वर्षों से अखंड भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है.