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विंध्‍य में जातिगत टिप्‍पणी के आरोप से गरमाई थी सियासत, भाजपा नेताओं को हेमंत खंडेलवाल की नसीहत, अब बदले स्‍वर

Leaders from the Vindhya region meet the state president

विंध्‍य के नेताओं की प्रदेश अध्‍यक्ष से मुलाकात

MP News: विंध्य की राजनीति में बीजेपी नेताओं के बीच छिड़ी जंग ने प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी थी. विंध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अजय सिंह पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे. मामला थाने तक भी पहुंचा, हालांकि बाद में शिकायत वापस ले ली गई.

विवाद बढ़ा तो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दोनों नेताओं को आमने-सामने बैठाकर कड़ी नसीहत दी. अब दोनों नेता विवाद खत्म होने की बात कह रहे हैं, लेकिन सवाल यही है कि विंध्य की सियासत में यह शांति आखिर कब तक कायम रहेगी?

दरअसल, विंध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और पूर्व विधायक पंचूलाल प्रजापति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक पत्र लिखकर प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अजय सिंह पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए थे. इस मामले में पंचूलाल ने स्थानीय थाने में भी शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया. इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद विंध्य से लेकर भोपाल तक भाजपा की अंदरूनी राजनीति में हलचल मच गई थी.

दोनों भाजपा नेताओं को दी नसीहत

मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दोनों नेताओं को एक साथ बैठाया और कड़ी चेतावनी देते हुए आपसी विवाद खत्म करने की नसीहत दी. शीर्ष नेतृत्व की समझाइश के बाद अब दोनों नेताओं के सुर बदले नजर आ रहे हैं. पंचूलाल प्रजापति ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था, लेकिन मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष की समझाइश के बाद अब पूरा विवाद समाप्त हो गया है.

वहीं, अजय सिंह पटेल का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि पंचूलाल प्रजापति ने इस तरह के आरोप क्यों लगाए थे. हालांकि प्रदेश अध्यक्ष की समझाइश के बाद अब दोनों के बीच किसी तरह का मनमुटाव नहीं है और ऐसे आप प्राधिकरण के अध्यक्ष ने किसी तीसरे के कहने पर लगाए हैं.

प्रदेश अध्‍यक्ष ने किया हस्‍तक्षेप

फिलहाल भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की दखल के बाद विंध्य विकास प्राधिकरण के दोनों पदाधिकारियों के बीच विवाद थमता नजर आ रहा है. लेकिन जिस तरह यह मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा और फिर प्रदेश अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा, उसने भाजपा के अंदरूनी समीकरणों को जरूर उजागर कर दिया है. अब देखना होगा कि यह सुलह कितने दिनों तक कायम रहती है या फिर विंध्य की सियासत में एक बार फिर कोई नया भूचाल आता है.

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