मऊगंज में राखी के वचन भूले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, रास्ते को तरस रहे ग्रामीण, प्रशासनिक दावों पर उठे सवाल? जिम्मेदार मौन!

Mauganj Marriage Pathway Dispute: मऊगंज जिले में नौढ़िया नंबर-1 के आदिवासी परिवारों का कहना है कि उन्हें किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि अपने घरों तक पहुंचने के मूल अधिकार की जरूरत है.
Former Assembly Speaker Girish Gautam Promised Road

मऊगंज जिले में रास्ते को तरस रहे ग्रामीण, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष भी वादा कर भूले

Former Assembly Speaker Girish Gautam Promised Road: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की देवतालाब विधानसभा अंतर्गत ग्राम नौढ़िया नंबर-1 इन दिनों रास्ते के अधिकार को लेकर संघर्ष का प्रतीक बन गया है. यह वही गांव है जहां क्षेत्र के विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम राखी बंधवाने पहुंचते रहे हैं, लेकिन इसी गांव के लगभग 60 आदिवासी एवं पिछड़ा वर्ग के परिवार वर्षों से अपने घरों तक पहुंचने के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि शासकीय आम रास्ते पर अतिक्रमण कर निर्माण कर लिया गया है, जिससे उनका आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

बेटी की विदाई पर भी नहीं पसीजा दिल

गांव की पीड़ा उस समय और गहरी हो गई जब एक बेटी की शादी के बाद उसकी विदाई के दौरान भी रास्ता नहीं खोला गया. ग्रामीणों का आरोप है कि जिस मार्ग से लोगों का आवागमन होता है, वहां लगे लोहे के गेट पर ताला जड़ दिया गया. मजबूरन नवविवाहिता की विदाई खेतों की मेड़ों और मोटरसाइकिल के सहारे करानी पड़ी. ग्रामीणों का कहना है कि जहां समाज में बेटी की डोली के लिए लोग अपने मतभेद भुला देते हैं, वहीं नौढ़िया में मानवता भी ताले के पीछे कैद नजर आई.

प्रशासन कहता है रास्ता खुला, ग्रामीण बता रहे बंद

मामला सिविल कोर्ट में विचाराधीन है. प्रशासन का दावा है कि गांव के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध है, लेकिन ग्रामीण इस दावे को खारिज कर रहे हैं. उनका कहना है कि जिस वैकल्पिक रास्ते की बात की जा रही है, वहां भी लोहे का गेट लगा है और अधिकतर समय उसमें ताला बंद रहता है. ग्रामीणों ने फोटो और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत कर जमीनी हकीकत सामने रखने का दावा किया है.

बरसात में बन जाते हैं कैदखाने जैसे हालात

ग्रामीणों के अनुसार बरसात के मौसम में स्थिति और विकट हो जाती है. रास्ता बाधित होने से कई घरों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है. बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना, गर्भवती महिला को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना या किसी आपात स्थिति से निपटना बड़ी चुनौती बन जाता है. लोगों का कहना है कि वे वर्षों से इस समस्या का स्थायी समाधान मांग रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही.

लोकायुक्त तक पहुंची शिकायत, रिपोर्ट पर सवाल

ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत लोकायुक्त संगठन भोपाल तक भी पहुंचाई थी. उनका आरोप है कि जांच के दौरान प्रस्तुत रिपोर्ट में वैकल्पिक मार्ग को चालू और सुगम बताया गया, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी और प्रशासनिक दावों की वास्तविकता उजागर हो जाएगी.

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बच्चों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मांगा न्याय

हाल ही में गांव के छोटे-छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हाथों में न्याय की मांग वाले पर्चे लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे. बच्चों ने अपनी पीड़ा कागजों पर लिखकर प्रशासन के सामने रखी और पूछा कि आखिर उन्हें अपने ही गांव में रास्ते के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है. इस दौरान उनकी मुलाकात एसडीएम से भी हुई, लेकिन समस्या का समाधान अभी तक नहीं निकल सका है.

सबसे बड़ा सवाल: आखिर कब खुलेगा रास्ता?

नौढ़िया नंबर-1 के आदिवासी परिवारों का कहना है कि उन्हें किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि अपने घरों तक पहुंचने के मूल अधिकार की जरूरत है. उनका आरोप है कि वर्षों से वे प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है. अब उन्होंने जिला कलेक्टर से निष्पक्ष जांच, शासकीय मार्ग से अतिक्रमण हटाने और भ्रामक रिपोर्ट देने वालों पर कार्रवाई की मांग की है. फिलहाल पूरे गांव की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं और लोग इंतजार कर रहे हैं कि आखिर कब उनके जीवन से यह बंद रास्ते का ताला हटेगा.

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