Rewa News: खेत में उतरे रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा…खुद थामा ट्रैक्टर, मिट्टी में बहाया पसीना और बोए अनाज

Meta description Insert variable: सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा कि इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने के कारण किसानों को ऐसी फसलों की ओर ध्यान देना चाहिए, जिन्हें कम पानी की आवश्यकता होती है. उन्होंने किसानों से कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा, रागी सहित अन्य मोटे अनाज बोने की अपील करते हुए कहा कि ये फसलें जल संकट के समय किसानों के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प हैं.
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खेत में उतरे सांसद जनार्दन मिश्रा

Rewa MP Janardan Mishra Farming: मध्य प्रदेश के रीवा मऊगंज में बदलते मौसम और कम बारिश की चुनौती के बीच रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने किसानों के बीच एक प्रेरणादायक संदेश देने के लिए स्वयं ट्रैक्टर का स्टेयरिंग संभाला और अपने खेत में परंपरागत मोटे अनाज की बुवाई की. खेत में उतरकर उन्होंने किसानों को यह भरोसा दिलाया कि कठिन परिस्थितियों में भी सही फसल का चयन करके खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है.

कम बारिश में मोटे अनाज ही बेहतर विकल्प

सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा कि इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने के कारण किसानों को ऐसी फसलों की ओर ध्यान देना चाहिए, जिन्हें कम पानी की आवश्यकता होती है. उन्होंने किसानों से कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा, रागी सहित अन्य मोटे अनाज बोने की अपील करते हुए कहा कि ये फसलें जल संकट के समय किसानों के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प हैं.

श्री अन्न से बढ़ेगी किसानों की आय

उन्होंने कहा कि मोटे अनाज केवल कम पानी में अच्छी पैदावार ही नहीं देते, बल्कि पोषण से भरपूर होने के कारण इनकी बाजार में मांग भी लगातार बढ़ रही है. यदि किसान परंपरागत अनाजों को अपनाते हैं तो उनकी लागत कम होगी और आय बढ़ने की संभावना भी मजबूत होगी.

खेत में उतरे सांसद

सांसद को स्वयं ट्रैक्टर चलाकर बुवाई करते देख आसपास के किसानों में उत्साह देखने को मिला. ग्रामीणों ने इसे किसानों के प्रति उनके जुड़ाव और कृषि के प्रति समर्पण का प्रतीक बताया. कई किसानों ने भी मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए मोटे अनाज की खेती अपनाने की बात कही.

जलवायु परिवर्तन के दौर में नई सोच की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चित मानसून और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में मोटे अनाज भविष्य की खेती का मजबूत आधार बन सकते हैं. ऐसे समय में जनप्रतिनिधियों द्वारा खेत में उतरकर किसानों को जागरूक करना कृषि के प्रति सकारात्मक संदेश माना जा रहा है.

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समय के साथ बदलें खेती की दिशा

रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा की यह पहल केवल एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों को समय के अनुसार खेती की दिशा बदलने का संदेश है. कम बारिश की चुनौती के बीच मोटे अनाज की खेती अपनाकर किसान अपनी आय, जल संरक्षण और खाद्य सुरक्षा तीनों को मजबूत कर सकते हैं.

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