मऊगंज में किसानों का अनोखा प्रदर्शन, गले में पगाहा डालकर तहसील पहुंचे; कार्रवाई ना होने से परेशान थे
मऊगंज के तहसील ऑफिस में किसानों का अनोखा प्रदर्शन.
Mauganj News: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की हनुमना तहसील से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और आम नागरिकों की समस्याओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अपनी वारसाना फाइल के निराकरण के लिए महीनों से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे एक किसान ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया.
किसान गले में पगाहा (मवेशियों को बांधने वाली रस्सी) डालकर लोक सेवा केंद्र पहुंच गया. उसका कहना था कि जब उसकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है, जब बार-बार आवेदन और गुहार लगाने के बाद भी उसकी फाइल आगे नहीं बढ़ रही, तो उसे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उसकी पहचान एक इंसान की नहीं बल्कि एक मवेशी की रह गई हो.
बार-बार तहसील ऑफिस के चक्कर काटकर परेशान हो गए
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार किसान काफी समय से अपनी वारसाना संबंधी फाइल के निराकरण के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहा था. लेकिन लगातार देरी और सुनवाई ना होने से वह मानसिक रूप से परेशान हो गया. अंततः उसने अपनी पीड़ा और आक्रोश को प्रतीकात्मक रूप में व्यक्त करने के लिए गले में पगाहा डालकर विरोध दर्ज कराया.
किसान की यह तस्वीर और वीडियो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए. वीडियो वायरल होते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया. सूचना मिलने पर एसडीएम और तहसीलदार तत्काल मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने किसान को समझाइश दी, उसके गले से पगाहा हटवाया तथा उसकी लंबित फाइल के शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया.
लापरवाह अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जांच कराने और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात भी कही है. हालांकि इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिकों और किसानों को सरकारी कामकाज के लिए होने वाली परेशानियों को उजागर कर दिया है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक किसान की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों ग्रामीणों की पीड़ा है जो अपने छोटे-छोटे राजस्व और प्रशासनिक कार्यों के लिए महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर होते हैं. कई बार फाइलों का निराकरण समय पर नहीं होने से लोगों को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
यह घटना केवल एक वायरल वीडियो भर नहीं है, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न भी है. सवाल यह है कि क्या किसी किसान को अपनी बात सुनाने के लिए इस तरह का प्रतीकात्मक विरोध करना पड़ेगा? क्या उसकी समस्या बिना प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुए नहीं सुनी जा सकती?
फिलहाल प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई और जांच का भरोसा दिया है, लेकिन अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह आश्वासन धरातल पर कितना उतरता है और क्या वास्तव में किसान को न्याय एवं सम्मान मिल पाता है. यह घटना शासन-प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी है कि यदि आम लोगों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं होगा, तो ऐसी तस्वीरें व्यवस्था की संवेदनशीलता पर लगातार सवाल उठाती रहेंगी.
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