मौसम के साथ-साथ अन्नदाताओं पर सिस्टम की मार! बारिश के बीच मंडियों में भीगा सैकड़ों क्विंटल गेहूं, जिम्मेदार बेखबर
किसानों की मेहनत बेकार
Sagar News: मध्य प्रदेश के मौसम को लेकर मौसम विभाग लंबे समय से अलर्ट जारी कर रहा है. पिछले दिनों मौसम विभाग की तरफ से साफ कहा गया था कि प्रदेश के 26 से ज्यादा जिलों में बारिश और आंधी देखने को मिल सकती है. इसके बाद भी ना तो कोई इंतजाम किए गए और ना ही किसानों की फसल बचाने के लिए किसी तरह का कोई पहले से उपाय किया गया. इसका असर यह रहा कि लाखों रुपये की फसल बारिश में भीग गई.
मध्य प्रदेश के अन्नदाताओं के सामने एक बार फिर सरकारी व्यवस्था की पोल खुलकर सामने आई है. खरीद केंद्रों पर लापरवाही, हम्मालों की कमी और समय पर परिवहन न होने की वजह से लाखों का अनाज बारिश में भीग गया. जब मौसम का अलर्ट पहले से था, इसके बाद भी किसी तरह की कोई तैयारी नहीं की गई थी.
प्रदेश के कई खरीद केंद्रों पर गेहूं, चना और मसूर की बोरियां खुले में पड़ी रहीं. जो कि अभी भी ऐसी ही पड़ी हुई हैं., अचानक हुई बारिश कारण यह पूरी तरह भीग गईं. सागर जिले के बीना के केवल दो केंद्रों पर ही करीब 50 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हो गया. कहीं 100 क्विंटल से ज्यादा गेहूं खराब हुआ तो कहीं दालें पानी में सड़ने की कगार पर पहुंच गई हैं.
केंद्रों पर हम्माल न होने से काम ठप
कई केंद्रों पर मजदूरों की भारी कमी सामने आई है. बोरियों को ढंकने या सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त हम्माल नहीं थे. जब बारिश शुरू हुई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी, किसानों की मेहनत यूं ही पानी में बह गई. इसके अलावा कई जगहों पर हम्माली का पैसा भी किसानों से ही वसूला जा रहा है.
अनाज खराब होने का सीधा असर किसानों पर पड़ा है, जिनकी फसल भीग गई, उनके भुगतान पर भी संकट खड़ा हो गया है. कई किसान 6-6 दिन तक केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन न तो तौल समय पर हो रही है और न ही अनाज उठ पा रहा है.
खरीद केंद्र या जोखिम केंद्र?
प्रदेश के खरीद केंद्रों पर हालात ऐसे बन गए हैं कि कई जगह खरीद केंद्र किसानों के लिए राहत की जगह जोखिम का केंद्र बनते जा रहे हैं. बोरियों को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त शेड नहीं हैं, तिरपाल की व्यवस्था कमजोर है और निगरानी लगभग नदारद है.
हर साल बारिश के मौसम में ऐसे हालात बनते हैं, लेकिन इसके बाद भी किसी तरह का कोई सुधार नहीं होता है. अगर समय रहते परिवहन, भंडारण और हम्मालों की व्यवस्था को दुरुस्त किया गया होता, तो किसानों की मेहनत यूं ही बर्बाद नहीं होती.
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