MP के बुजुर्गों के लिए होप एप नई आशा! राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अनोखी पहल, घर पहुंचकर डॉक्टर कर रहे इलाज

प्रदेश भर में 56 लाख से ज्यादा बुजुर्ग हैं. फिलहाल 6 जिलों में एक लाख बुजुर्गों का चयन किया गया है. भोपाल में 730 बुजुर्गों का होप एप में रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है.
In Madhya Pradesh, elderly people are being treated after reaching their homes.

मध्य प्रदेश में घर पहुंचकर बुजुर्गों का इलाज हो रहा है.

MP News: मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन बुजुर्गों के इलाज के लिए होप एप की अनोखी पहल लेकर आया है. ऐसे बुजुर्ग जो 60 साल से ऊपर के हैं. खुद अपना इलाज करा पाने में सक्षम नहीं हैं और गंभीर बीमारियों का शिकार हैं. तो ऐसे बुजुर्गों के लिए एनएचएम नई होप यानी आशा की नई किरण बनकर आया है. जिसमें बुजुर्गों को सही इलाज के साथ ही संबल, सांत्वना और जीने की नई उम्मीद दे रहा है.

पूरे प्रदेश में किया जा रहा बुजुर्गों का सर्वे

होप यानी होम बेस्ड केयर प्रोग्राम फॉर एल्डरली योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने शुरू किया है. इस योजना के तहत प्रदेश भर में बुजुर्गों का सर्वे किया जा रहा है. आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर सर्वे कर रही है. राजधानी भोपाल के साथ 6 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के साथ योजना शुरू की गई है. प्रदेश भर में 56 लाख से ज्यादा बुजुर्ग हैं. फिलहाल 6 जिलों में एक लाख बुजुर्गों का चयन किया गया है. भोपाल में 730 बुजुर्गों का होप एप में रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है. होप एप में तीन कैटेगरी हैं मोरल, मॉड्रेड और सीवियर हैं. जिसमें नॉर्मल मरीजों के लिए हर 21 दिन में नर्सिंग स्टाफ घर पहुंचता है. मॉड्रेड में 14 दिन में और सीवियर बीमारी वाले बुजुर्गों के पास हर सात दिन में नर्सिंग स्टॉफ की टीम पूरे उपकरणों के साथ पहुंचता है और सारी रिपोर्ट होप एप पर अपलोड करता है. जिससे मरीजों को शारीरिक इलाज के साथ ही मानसिक रूप से भी स्वास्थ्य लाभ मिल सकें.

पीबी, शुगर के साथ ड्रेसिंग भी तत्काल दी गई

भोपाल के भानपुर इलाके में 85 साल की बुजुर्ग महिला हैं, जो चल फिर पाने में समक्ष नहीं हैं. परिजनों को अस्पताल तक ले जाने में बहुत परेशान होती है. लेकिन होप एप के तहत नर्स और पास के संजीवनी क्लीनिक के डॉक्टर घर पहुंचे हैं. बुजुर्ग महिला का बीपी, शुगुर चेक करने के साथ ही ड्रेसिंग भी तत्काल की जा रही है. विस्तार न्यूज़ ने जब नर्स और परिजनों से बात की तो उन्होंने बताया कि हम हर 21 दिन में आएंगे. इलाज कर रहे हैं. अलग शुरूआती इलाज के बाद अस्पताल में एडमिट करने की जरूरत लगेगी तो तुरंत किया जाएगा.

होप योजना से जुड़ी जानकारी

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की पहल
  • 06 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट
  • भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, रीवा
  • प्रदेश भर में एक लाख बुजुर्गों का चयन
  • प्रदेश भर में 57लाख से ज्यादा बुजुर्ग
  • होप एप पर भोपाल में 730 बुजुर्ग रजिस्टर्ड
  • होम बेस्ड केयर प्रोग्राम फॉर एल्डरली योजना

96 साल की बुजुर्ग के लिए पहुंच रहे डॉक्टर

84 साल के बुजुर्ग श्यामशरण मिश्रा हैं. रीढ़ की हड़्डी की परेशानी के चलते सालों से बिस्तर पर ही हैं. बुजुर्ग दिन भर घर पर अकेले ही रहते हैं. ऐसे में आशा कार्यकर्ता के सर्वे के बाद जब डॉक्टर और नर्स इलाज के लिए पहुंचे तो बुजुर्ग को इलाज के लिए सुकून भी मिल. विस्तार न्यूज़ पर बुजुर्ग ने कहा कि सात सालों से कोई चेकअप ही नहीं हुआ है. अलग से एबुलेंस बुलाने के लिए पैसे नहीं हैं. नर्स ने बीपी, शुगर और आंखों की जांच की. इलाज के लिए खुशी इस बात की है कोई तो खबर लेने के लिए पहुंचा है. वहीं पास में ही एक और 96साल की बुजुर्ग महिला को नर्सिंग स्टाफ इलाज देने के लिए हर महीने पहुंच रहा है. इलाज के बाद सारी रिपोर्ट्स होप एप पर अपलोड की जा रही है, ताकि समय समय पर मरीजों की मॉनिटिंरिंग भी हो सके.

एनएचएम की डायरेक्टर सलोनी सडाना ने कहा कि बुजुर्गों को सिर्फ इलाज नहीं देना है, बल्कि मानसिक संबल भी देना है. इसलिए होप योजना शुरू की है. इसका मकसद उन मरीजों को चिह्नित करना है, जो अब पूरी तरह से बेड पर हैं. उनको घर पर सही समय पर इलाज देना है. सफल होने पर पूरे प्रदेश भर में लागू किया जाएगा.

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