‘कांग्रेस पार्टी दिशाहीन हो चुकी है…’, जीतू पटवारी और सुमित्रा महाजन की मुलाकात पर सियासत, भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना
जीतू पटवारी और सुमित्रा महाजन की मुलाकात
Indore News: इंदौर में हुई कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की मुलाकात को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. इस मुलाकात पर भारतीय जनता पार्टी के नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने तीखा तंज कसते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है. सुमित मिश्रा ने कहा कि जीतू पटवारी सुमित्रा महाजन से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे और आने वाले समय में वह भाजपा की सदस्यता लेने भी आ सकते हैं.
सुमित्रा महाजन का आशीर्वाद लेने आए थे जीतू पटवारी – सुमित मिश्रा
भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जीतू पटवारी सुमित्रा महाजन का आशीर्वाद लेने आए थे. कांग्रेस की हालत आज ऐसी हो गई है कि उनके प्रदेश अध्यक्ष को भी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के दरवाजे पर जाना पड़ रहा है. मुझे पूरा विश्वास है कि थोड़े ही दिनों में जीतू पटवारी भाजपा की सदस्यता लेने भी पहुंच जाएंगे.
भाजपा के अनुभवी नेताओं का मार्गदर्शन लेने पर मजबूर
सुमित मिश्रा ने कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी पूरी तरह दिशाहीन हो चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता खुद अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं और यही वजह है कि वे भाजपा के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं से मार्गदर्शन लेने को मजबूर हो रहे हैं. भाजपा नगर अध्यक्ष ने आगे कहा कि सुमित्रा महाजन जैसी वरिष्ठ नेता का राजनीतिक जीवन पूरी तरह राष्ट्र और संगठन को समर्पित रहा है. उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता से हर राजनीतिक दल के नेता प्रभावित हैं, लेकिन कांग्रेस के लिए यह मुलाकात उसकी कमजोर स्थिति को उजागर करती है.
कांग्रेस ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया
इस बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है. कांग्रेस की ओर से अभी तक इस तंज पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पार्टी के अंदर इसे लेकर नाराजगी बताई जा रही है.
मुलाकात को लेकर गरमाई राजनीति
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जीतू पटवारी और सुमित्रा महाजन की मुलाकात को अलग-अलग राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है. भाजपा इसे कांग्रेस की कमजोरी और आंतरिक असमंजस से जोड़कर देख रही है, जबकि कांग्रेस इसे सामान्य शिष्टाचार मुलाकात बता सकती है. फिलहाल इस मुलाकात को लेकर इंदौर की राजनीति गरमाई हुई है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया और भाजपा के अगले बयान राजनीतिक माहौल को और तीखा बना सकते हैं.
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