MP News: टाइगर स्टेट में बढ़ी बाघों की मौतों की संख्या, हाई कोर्ट ने केंद्र, राज्य और एनटीसीए को भेजा नोटिस
मध्य प्रदेश में बाघों की मौतों का आकड़ा बढ़ा
MP News: एक तरफ मध्य प्रदेश को टायगर स्टेट का दर्जा हासिल है, तो दूसरी तरफ बाघों की मौत भी लगातार मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा हो रही हैं. इस मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जाहिर की है. एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिका में टाइगर स्टेट के रूप में पहचान बनाने वाले मप्र में 54 टाइगरों की मौत पर सवाल उठाए गए हैं. ये मौतें वर्ष 2025 में हुई हैं. चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने आरोपों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र, मप्र सरकार और नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी को जवाब पेश करने को कहा है. केस की अगली सुनवाई 11 फरवरी को निर्धारित की गई है.
प्रदेश में 54 बाघों की मौत दर्ज
भोपाल के वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे की ओर से दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि जनवरी से 19 दिसंबर 2025 के बीच प्रदेश में 54 बाघों की मौत दर्ज की गई है. यह 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद किसी एक वर्ष में सबसे अधिक है. याचिका में यह भी दावा किया गया है कि प्रदेश में बाघों की मौत के मामलों में से लगभग 57 प्रतिशत मौतें अप्राकृतिक मानी गई हैं. सबसे अधिक मौतें शहडोल-बांधवगढ़ लैंडस्केप और रातापानी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में दर्ज की गई हैं. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कार्कस बिजली लाइनों के पास मिलने से करंट से मौत की आशंका जताई जा रही है. इन्हें आपसी संघर्ष बताकर जांच से बचा जा रहा है.
हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया मुद्दा
याचिका में उठाए गए तर्कों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से लिया है. हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार के साथ ही एनटीसीए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि आखिर बाघों की मौत क्यों हो रही है और इसे रोकने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं. 11 फरवरी को हाईकोर्ट में जवाब पेश करने के आदेश दिए गए हैं.