Tiger Tourism Corridor: एमपी में 5 हजार करोड़ की लागत से बनेगा टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर, 4 नेशनल पार्क आपस में जुड़ेंगे
टाइगर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Tiger Tourism Corridor: वाइल्डलाइफ के मामले धनी मध्य प्रदेश के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ने वाली है. देश का पहला टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर एमपी में तैयार किया जाएगा. इससे राज्य के पर्यटन के साथ-साथ का आर्थिक एवं अन्य गतिविधियों को गति मिलेगी. ये कॉरिडोर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में उत्तर-दक्षिण दिशा में बनाया जाएगा.
‘वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कदम उठाए जा रहे’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत में मध्य प्रदेश सबसे अधिक टाइगर वाला राज्य है. यहां सर्वाधिक टाइगर रिजर्व भी हैं. प्रदेश में सभी प्रकार के वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वन्यजीव पर्यटन स्थलों को एक कॉरिडोर से जोड़ा जा रहा है.
उन्होंने आगे कहा कि इसे टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर नाम दिया गया है. राज्य सरकार वन्यजीवों और पर्यटन को प्रोत्साहन दे रही है. एमपी की भौगोलिक स्थिति के कारण टाइगर कॉरिडोर एक प्रकार से पड़ोसी राज्यों के लिए भी बड़ी सौगात होगी. इससे व्यावसायिक और अन्य सभी जरूरी गतिविधियों के लिए यह मार्ग सुगमतापूर्वक उपलब्ध रहेगा. राज्य में प्रमुख टाइगर रिजर्व को आपस में जोड़ने वाली सड़कों का उन्नयन किया जाएगा.
‘पड़ोसी से राज्यों से आ रहे पर्यटक’
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश को कई सौगातें मिल रही हैं. श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बसाहट के बाद यह क्षेत्र वन्यप्राणी प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. उन्होंने टूरिस्टों के बारे में कहा कि एमपी समेत पड़ोसी राज्य राजस्थान और यूपी के अलावा अन्य राज्यों के पर्यटक भी भ्रमण के लिए पहुंच रहे हैं.
ये भी पढ़ें: MP News: रीवा कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, परिसर कराया गया खाली, बम स्क्वॉड कर रही सर्चिंग
क्या है टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर की खासियत?
- 5000 करोड़ की लागत से कॉरिडोर तैयार किया जाएगा.
- इस कॉरिडोर की लंबाई 625 किमी होगी.
- इसके बनने के बाद टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा.
- पर्यटन के साथ अन्य गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.
- इससे 4 नेशनल पार्क (पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना) आपस में जुड़ेंगे.