विदिशा में ‘नहर चोरी’! दस्तावेजों में केवल नाम, जमीन पर खड़ी कंक्रीट की इमारतें, जानें क्या है मामला

MP News: विदिशा में सिंचाई के लिए दशकों पहले ‘उद्वहन सिंचाई योजना’ के तहत दौलतपुरा और मदनखेड़ा में नहर बनाई गई थी. अब तक 11 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं. जिन पर नहर की जमीन पर कब्जे का आरोप है.
Vidisha Canal Concrete buildings revenue department issued notice to 11 people

विदिशा: नहर की जगह बना दी गईं इमारतें

MP News ( विदिशा से सुरेंद्र सिंह राजपूत की रिपोर्ट): मध्य प्रदेश के विदिशा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करती है. जहां कभी किसानों के लिए नहर हुआ करती थी, आज वहां कब्जे की कंक्रीट खड़ी है. दशकों पुरानी नहर अब जमीन से गायब है और इस “नहर चोरी” ने अब सियासत को भी उबाल पर ला दिया है.

दशकों पहले बनी थी नहर

विदिशा में सिंचाई के लिए दशकों पहले ‘उद्वहन सिंचाई योजना’ के तहत दौलतपुरा और मदनखेड़ा में नहर बनाई गई थी. मकसद साफ था कि हर खेत तक पानी पहुंचे. हर किसान की फसल बचे लेकिन आज जहां पानी बहना था, वहां कंक्रीट की इमारतें हैं. नहर की जमीन पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर लिया और देखते-ही-देखते आलीशान कॉलोनियां बस गईं.

‘नहर चोरी हो गई’

नहर का नाम तो बचा है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है. यहां अब सिर्फ एक जर्जर ढांचा बचा है, जो कभी पानी सप्लाई करता था. बाकी सब या तो मिट गया या कब्जे में चला गया. अब ये मामला सिर्फ जमीन का नहीं सियासत का बड़ा मुद्दा बन चुका है क्योंकि ये वही विदिशा है. जहां से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आते हैं. कांग्रेस ने सीधा हमला बोला है कि “किसानों के हित की बात करने वाले मंत्री के जिले में ही नहर चोरी हो गई और उन्हें खबर तक नहीं.”

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11 को नोटिस जारी किया गया

बेतवा घाट किनारे जहां लाखों की मशीनें लगाई गई थीं. आज वह या तो कबाड़ बन चुकी हैं या धीरे-धीरे चोरी हो रही हैं. सरकारी योजना अब सिर्फ फाइलों में जिंदा है. अधिकारियों ने माना मामला 40-50 साल पुराना है. कागज खंगालने में वक्त लग रहा है लेकिन जैसे-जैसे दस्तावेज मिल रहे हैं, राजस्व विभाग को भेजे जा रहे हैं. इधर, राजस्व विभाग भी हरकत में आया है, दशकों पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं. अब तक 11 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं. जिन पर नहर की जमीन पर कब्जे का आरोप है.

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