MP में प्राइमरी ड्रॉपआउट जीरो, लेकिन 12वीं तक पढ़ाई से बाहर हो रहे बच्चे; नीति आयोग की रिपोर्ट में खुलासा
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MP News: मध्य प्रदेश में प्राइमरी ड्रॉप आउट जीरो हो गया है. नीति आयोग की रिपोर्ट ‘स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया’ में ये बात निकलकर सामने आई है. ये खबर राहत जरूर दे सकती है, लेकिन इसके साथ ही रिपोर्ट में मध्य प्रदेश शिक्षा नीति की एक और तस्वीर सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक 55 परसेंट बच्चे 12वीं तक ही पढ़ाई से बाहर हो रहे हैं.
10 साल में ड्रॉप आउट 10.14% से घटाकर जीरो हुआ
‘स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया’ की मध्य प्रदेश में रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक दशक में प्राइमरी एजुकेशन में 10 साल में ड्रॉप आउट 10.14% से घटाकर जीरो हो गया है. लेकिन 10वीं और 12वीं तक स्कूल जाने वाले बच्चों का ड्रॉप आउट होना अभी भी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है. 8वीं के बाद 9वीं और 10वीं क्लास में बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं. 9वीं और 10वीं क्लास में ड्रॉप आउट लगभग 17 परसेंट है. मतलब अगर 100 बच्चे 8वीं पास करते हैं तो उसमें 17 बच्चे या तो 9वीं या फिर 10वीं क्लास में पढ़ाई छोड़ देते हैं. वहीं 10वीं पास करने के बाद 69 प्रतिशत बच्चे ही 11वीं में एडिमिशन लेते हैं.
10वीं के बाद एडिमिशन लेने वाले फिसड्डी राज्यों में 9वें स्थान पर MP
10वीं के बाद 11वीं क्लास में बच्चों के एडमिशन लेने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. जहां देश का औसत ट्रांजिशन रेट लगभग 75 प्रतिशत है तो वहीं मध्य प्रदेश के मामले में ये 69 प्रतिशत है. 10वीं के बाद 11वीं में एडमिशन लेने वाले स्कूली बच्चों के मामले में फिसड्डी राज्यों में मध्य प्रदेश का 9वां नंबर है. सबसे खराब ट्रांजिशन रेट मेघालय का 47.8 प्रतिशत है.
7 हजार से ज्यादा ऐसे स्कूल, जहां सिर्फ एक टीचर
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में टीचर के कुल 52 हजार से ज्यादा पद खाली हैं. जबकि इनमें से प्राइमरी स्कूलों में ही खाली पदों की संख्या 47122 है. ऐसे में पूरे प्रदेश की बात करें तो 7 हजार से ज्यादा ऐसे स्कूल हैं, जहां सिर्फ एक टीचर है. मतलब पूरा स्कूल सिर्फ एक टीचर के भरोसे चल रहा है. अब सवाल ये है कि जब पूरे स्कूल में सिर्फ एक ही टीचर पढ़ाता है तो वहां शिक्षा की गुणवत्ता क्या होगी.
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