प्रकृति का अनोखा चमत्कार है जबलपुर का बैलेंसिंग रॉक, 6.5 तीव्रता का भूकंप भी नहीं हिला पाया
Jabalpur Balancing Rock Earthquake: भारत में ऐसी कई जगहें हैं जहां प्रकृति के करिश्मे देखकर आंखों पर यकीन नहीं होता. ऐसी ही एक जगह मध्य प्रदेश के जबलपुर में मौजूद है जो पूरी दुनिया में मशहूर है. यहां एक विशालकाय चट्टान बिना किसी सहारे के सिर्फ कुछ इंच पर दूसरी चट्टान पर टिकी हुई है. सदियों से खड़ी इस संतुलित शिला का रहस्य आज तक कोई नहीं समझ पाया है.
जबलपुर की मदन महल पहाड़ी पर स्थित बैलेंसिंग रॉक को देखकर लगता है कि यह अभी गिर जाएगी, लेकिन यह सदियों से ऐसे ही टिकी हुई है.
बताया जाता है कि कई क्विंटल वजनी यह विशाल चट्टान सिर्फ 6 इंच चौड़े छोटे से बेस पर संतुलन बनाए हुए है.
1997 में जबलपुर में 6.5 तीव्रता का भयानक भूकंप आया था, जिसमें कई इमारतें ढह गई थीं, लेकिन यह चट्टान एक इंच भी नहीं खिसकी.
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह चट्टानें मैग्मा के जमने से बनी ग्रेनाइट चट्टानें हैं, लेकिन इसके संतुलन का सटीक कारण कोई नहीं बता पाया.
कुछ वैज्ञानिक इसके पीछे गुरुत्वाकर्षण बल का कमाल मानते हैं, तो कुछ इसे प्रकृति का अद्भुत चमत्कार कहते हैं.
इस बैलेंसिंग रॉक को एशिया के तीन सबसे अद्भुत और रहस्यमयी संतुलित शिलाओं में शामिल किया गया है.
इसके आसपास हरा-भरा गार्डन बना हुआ है, जहां सुकून से बैठकर इस नजारे को देखा जा सकता है और फोटो खींची जा सकती है.
यहां से कुछ ही दूरी पर रानी दुर्गावती का ऐतिहासिक मदन महल किला और प्राचीन शारदा माता मंदिर भी है, जहां मानसून में घूमने का मजा ही अलग है.