नंदगांव में एक दिन बाद होता है कान्हा का जन्मोत्सव, जानें इसके पीछे की अनोखी परंपरा
One Day Later Festival Celebration: आज देशभर में बड़े ही धूमधाम से श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है. भक्त लड्डू गोपाल की प्रतिमाएं स्थापित कर उनकी उपासना कर रहे हैं. जन्माष्टमी के इस पावन त्योहार पर आज हर हिंदू परिवार में खुशी का माहौल है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं वाली भूमि नंदगांव में जन्माष्टमी का त्योहार आज नहीं बल्कि कल मनाया जाएगा. हर साल जहां जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ सदियों से नंदगांव में एक दिन बाद श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है. आइए जानते हैं कि आखिर क्यों एक दिन बाद नंदगांव में जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है और इसके पीछे क्या मान्यता है.
नंदगांव के नंद भवन में रक्षाबंधन से ही जन्माष्टमी की तैयारियां और कान्हा के जन्म की खुशी में बधाई गीत गाना शुरू हो जाता है, जिसे ब्रज के गायक लगातार आठ दिनों तक गाते हैं.
नंदगांव में भादो महीने की शुरुआत से ही पुजारी और संत लोग रोज कान्हा के जन्म की बधाई के खास गीत गाते हैं.
कैलेंडर में तारीखें घटने-बढ़ने से बधाई का कोई भी दिन छूट न जाए, इसीलिए ब्रजवासी बिना किसी कमी के यह उत्सव एक दिन बाद मनाते हैं.
सदियों पहले सेवायतों ने यह नियम बनाया था कि रक्षाबंधन के ठीक आठवें दिन ही नंदगांव में जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा.
इस खास नियम के कारण कान्हा के जन्म की बधाई का एक भी दिन कम नहीं होता और यही अनोखी परंपरा आज भी निभाई जा रही है.
नंदगांव में इसे केवल भगवान का जन्म नहीं, बल्कि नंद बाबा के घर लाला के आने की खुशी और एक बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है.
जन्माष्टमी के अगले दिन होने वाले नंद महोत्सव में भारी भीड़ उमड़ती है.