Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्र का पांचवां दिन आज, स्कंदमाता देवी की इस विधि से करें पूजा, जानें पूरी पूजन विधि

Chaitra Navratri: तांत्रिक साधनाओं में माता स्कंदमाता का संबंध विशुद्ध चक्र से माना जाता है. वहीं, ज्योतिषशास्त्र में इन्हें बृहस्पति से जोड़कर देखा जाता है. नवरात्र के पांचवें दिन सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग बन रहे हैं.
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देवी स्कंदमाता

Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्र का आज पांचवां दिन है. इस दिन देवी दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा होती है. स्कंद का मतलब कार्तिकेय से है, और उनकी माता होने के कारण स्कंदमाता कहा जाता है. चार भुजाओं वाली देवी स्कंदमाता सिंह की सवारी करती हैं. कमल को धारण करती है. मां का एक अन्य नाम पद्मासना देवी है क्योंकि माता कमल पर विराजिती हैं. ऐसी मान्यता है कि मां स्कंदमाता की आराधना करने से भगवान कार्तिकेय की पूजा का फल मिलता है.

ये है स्कंदमाता की पूजा का शुभ मुहूर्त

तांत्रिक साधनाओं में माता स्कंदमाता का संबंध विशुद्ध चक्र से माना जाता है. वहीं, ज्योतिषशास्त्र में इन्हें बृहस्पति से जोड़कर देखा जाता है. नवरात्र के पांचवें दिन सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग बन रहे हैं. आज (23 मार्च 2026) रात 8.49 बजे से शुरू होकर 24 मार्च 2026 की सुबह 6.21 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा.

देवी स्कंदमाता की पूजन विधि

  • हिंदू मान्यताओं के अनुसार देवी स्कंदमाता की पूजा करने से संतान प्राप्ति के योग मजबूत हो जाते हैं.
  • घर-परिवार में सुख और समृद्धि आती है. देवी स्कंदमाता का प्रिय रंग पीला माना जाता है.
  • मां की पूजा से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. स्कंदमाता को पीले फूल और भोग अर्पित करना चाहिए.
  • पूजा के दौरान पीले वस्त्र पहनना चाहिए. पूजन के अंत में संतान से जुड़ी प्रार्थना भी करना चाहिए.

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इस मंत्र का जाप करना चाहिए

  • नवरात्र में नौ दिनों का उपवास रखने वाले लोगों को स्वच्छता विशेष ध्यान रखना चाहिए.
  • मां स्कंदमाता की ध्यान पूर्वक पूजा करना चाहिए.
  • ‘ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे’ मात्र का जाप सावधानी से करना चाहिए.
  • इस मंत्र के जाप करने से वाणी और आत्मविश्वास में सुधार होता है.
  • पूजन विधि में किसी भी तरह की गलती होने पर क्षमा प्रार्थना मंत्र का जाप करना चाहिए.

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