Mahashivratri 2026: शिवलिंग में समाया है पूरा शिव परिवार, 3 देवता और गणों की भी होती है पूजा, जानिए कौन-कौन हैं विराजमान

Mahashivratri 2026: शिव पंचायत में पांच देवता शामिल होते हैं, वहीं शिव परिवार में माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय, भगवान गणेश समेत उनके सभी गण शामिल रहते हैं.
Shivling (file photo)

शिवलिंग (फाइल फोटो)

Mahashivratri 2026: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व सिर्फ भगवान शिव की उपासना का दिन नहीं होता है, बल्कि यह दिन पूरे शिव परिवार की एक साथ पूजा और साधना करने का दिन भी होता है. वैसे भी भगवान शिव की पूजा कभी भी अकेले नहीं होती है. बल्कि शिवजी की पूजा, शिव पंचायत और शिव परिवार के साथ की जाती है. शिव पंचायत में पांच देवता शामिल होते हैं, वहीं शिव परिवार में माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय, भगवान गणेश समेत उनके सभी गण शामिल रहते हैं. कुछ तो बहुत ही प्रमुख रूप से और कुछ उनके प्रतीकों के रूप में उनसे जुड़े होते हैं.

महाशिवरात्रि पर सबसे बड़ी बात है कि शिवजी के प्रतीक शिवलिंग में ही शिवजी का पूरा परिवार समाया है. मान्‍यता है कि शिवजी के अरघे में ही सारा शिव परिवार बसता है. इसे थोड़े व्‍यापक तरीके से देखा जाए तो शिवलिंग के अरघे में ही ब्रह्मांड की मौजूदगी मिलती है.

शिवलिंग में समाया पूरा शिव परिवार

  • महाशिवरात्रि के दिन शिव भक्त शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं. लेकिन इस बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं कि भगवान शिव के शिवलिंग में महादेव के साथ उनका पूरा परिवार विराजमान माना जाता है.
  • धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार, शिवलिंग का ऊपरी भाग स्‍वंग भगवान शिव का स्‍वरूप होता है, वहीं इसके चारों ओर स्थित गोल जलाधारी माता पार्वती के होने का प्रतीक होती है, जो शक्ति और ऊर्जा का आधार भी होती है. जलाधारी के दाई ओर भगवान गणेश और बाई ओर भगवान कार्तिकेय का स्‍थान माना जाता है. इसके साथ ही शिवलिंग के बीच वाली धारा वाली रेखा पर माता अशोक सुंदरी का वास माना जाता है. शिवलिंग के निचले भाग को माता पार्वती का हस्‍तकमल भी कहा जाता है. शिवलिंग पर ऊपर की तरफ से गिरती जलधारा भगवान शिव की जटाओं से निकलने वाली मां गंगा और मस्‍तक पर विराजमान चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है.
  • शिवलिंग के ऊपर मौजूद नाग उनके गण वासुकि बताए जाते है, जो समस्‍त नागजति को साथ लेकर शिवजी के साथ मौजूद होते हैं. वहीं शिवलिंग के सामने शांत मुद्र में नंदी बैठे हैं. इसमें माता पार्वती भी अपने प्रमुख वाहन सिंह के साथ विराजमान हैं.

शिवलिंग में विराजमान है 3 देवता

मान्‍यता है कि शिवलिंग के तीन मुख्‍य भाग हैं, जहां ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश तीनों विराजमान हैं.

  • निचला ब्रह्म भाग- शिवलिंग का सबसे निचला चौकोर भाग सृष्टि रचयिता भगवान विष्‍णु का प्रतीक माना जाता है.
  • मध्‍य विष्‍णु भाग- शिवलिंग का अष्‍टकोणीय भाग, जिसे वेदी भी कहा जाता है, यह सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्‍णु का प्रतीक माना जाता है.
  • ऊपरी शिव भाग- शिवलिंग का यह बेलनाकार भाग सबसे प्रमुख होता है, जो संहारकर्ता भगवान शिव का प्रतीक होता है और शिव को दर्शाता है.

भगवान शिव के साथ होती है पूरे शिव परिवार की पूजा

महाशिवरात्रि पर इसलिए मान्‍यता है कि जब भक्त शिवलिंग पर जल, दूध या बेलपत्र भगवान शिव को आर्पित करते हैं तो वे केवल शिव पर ही नहीं बल्कि पूरे शिव परिवार को अर्पित होते हैं. यही सबसे बड़ा कारण है कि इस दिन की गई पूजा विशेष फलदायी और घर में सुख-शांति लाने वाला माना जाता है.

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(डिस्क्लेमर: यह खबर धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिष शास्त्र और पंचांग आधारित जानकारी पर लिखी गई है. इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है. विस्तार न्यूज किसी भी ज्योतिषीय दावे की पुष्टि नहीं करता है.)

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