Makar Sankranti 2026: कब है मकर संक्रांति, 14 या 15 जनवरी? जानिए सही तिथि और पूजा विधि
सांकेतिक तस्वीर
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का पावन पर्व इस वर्ष 15 जनवरी 2026, गुरुवार को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा. इस दिन सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है. माघ माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि, वृद्धि योग और ज्येष्ठा नक्षत्र के संयोग में पड़ रही यह संक्रांति आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष फल देने वाली मानी जा रही है. इस दिन सूर्य मकर राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में विराजमान रहेगा, वहीं तैलित करण भी प्रभावी रहेगा.
मकर संक्रांति का पुण्यकाल सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा, इसलिए श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान और पूजा कर सकते हैं. दिल्ली में इस दिन सूर्योदय सुबह 7 बजकर 15 मिनट पर होगा, जिसके बाद स्नान और सूर्योपासना का विशेष महत्व रहेगा.
कब है मकर संक्रांति?
- मकर संक्रांति को लेकर हर साल की तरह इस बार भी 14 और 15 जनवरी की तिथि को लेकर भ्रम बना रहा, लेकिन ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस बार संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को ही मनाना श्रेष्ठ माना गया है. सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही पुण्यकाल शुरू होने के कारण इसी दिन दान, स्नान और पूजा करना अधिक फलदायी होगा.
मकर संक्रांति के दिन करें ये काम
- इस दिन स्नान के बाद सूर्यदेव की पूजा की जाती है. पूजा में काले तिल और काले तिल के लड्डू का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह सूर्य और शनिदेव दोनों से जुड़ा माना जाता है.
- गुड़ का संबंध भी सूर्य से है, इसलिए इसका दान और उपयोग शुभ माना जाता है. सूर्यपूजन में गाय के घी से दीपक जलाने की परंपरा है. इसके साथ सप्तधान्य यानी सात प्रकार के अनाज जैसे तिल, जौ, गेहूं, चना, मूंग, चावल और ज्वार या बाजरा का दान किया जाता है.
- सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तांबे का लोटा, लाल फूल और लाल चंदन प्रयोग में लाए जाते हैं. पूजा के समय मिट्टी या पीतल के दीपक में रुई की बाती या कपूर से दीप प्रज्वलित किया जाता है और धूप-गंध भी अर्पित किए जाते हैं.
- पूजन के दौरान सूर्य चालीसा और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ किया जाता है. सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए “ओम ऐहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजो राशे जगत्पते अनुकंपयेमां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर” और “ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” मंत्रों का जप किया जाता है.
मकर संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त में करें स्न्नान
- मकर संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय पवित्र नदी में स्नान करना श्रेष्ठ माना जाता है. यदि नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर ही शुद्ध जल से स्नान किया जा सकता है.
- स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर तांबे के लोटे में गंगाजल या साफ जल भरकर उसमें लाल चंदन, लाल फूल और गुड़ मिलाकर सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है.
- गायत्री मंत्र का जप, सूर्य चालीसा और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कर सूर्यदेव की आरती की जाती है. अंत में क्षमा प्रार्थना कर मनोकामना पूर्ति की कामना की जाती है. मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने पर सूर्यदेव की कृपा से जीवन में धन, स्वास्थ्य और सफलता बनी रहती है.
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(डिस्क्लेमर: यह खबर धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिष शास्त्र और पंचांग आधारित जानकारी पर लिखी गई है. इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है. विस्तार न्यूज किसी भी ज्योतिषीय दावे की पुष्टि नहीं करता है.)