सियासी निशाने पर तेजस्वी या नीतीश? PK सिर्फ जनता से जुड़ नहीं रहे, बल्कि अपने अंदाज़ से विरोधियों पर निशाना भी साध रहे हैं. लालू यादव की तरह PK भी मंच पर मज़ाक करते हैं, व्यंग्य कसते हैं और पूरे आत्मविश्वास से भरे रहते हैं. जहां लालू अपने विरोधियों को तीखे बंजों और हास्य के ज़रिए घेरते थे, वहीं PK खुलकर परिवारवाद पर हमला करते हैं.
बीजेपी जानती है कि नीतीश कुमार का अपना एक कोर वोट बैंक है और उनका अनुभव गठबंधन के लिए जरूरी है. इसलिए, चुनाव उनके नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा ताकि उनके समर्थक NDA के साथ बने रहें. दूसरी ओर बीजेपी बिहार में अपनी जड़ों को और मजबूत करना चाहती है और अंततः अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है.
Bihar Elections 2025: जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर बार-बार तेजस्वी यादव को निशाना बना रहे हैं.
Bihar Politics: लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन के मौके पर सीतामढ़ी में RJD कार्यकर्ताओं के बीच जमकर मारपीट हुई.
Tej Pratap Yadav: जगदानंद सिंह के बेटे RJD सांसद सुधाकर सिंह ने तेजप्रताप यादव के कथित दूसरी शादी के विवाद पर उनका बचाव किया है.
सवर्ण आयोग के जरिए नीतीश बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाना चाहते हैं. अगर अगड़ी जातियां यह महसूस करेंगी कि उनकी बात सुनी जा रही है, तो वे जेडीयू की ओर झुक सकती हैं. इसके इतर नीतीश ने EBC, OBC, और अल्पसंख्यकों को पहले ही साध रखा है.
तेज प्रताप की छवि हमेशा से ही रंगीली रही है. कभी कृष्ण के रूप में बांसुरी बजाना, तो कभी जलेबी तलना, उनके अंदाज ने हमेशा सुर्खियां बटोरी हैं. लेकिन इस बार मामला उनकी निजी जिंदगी और राजनीतिक करियर से जुड़ा है. अगर वे बगावत करते हैं, तो यह लालू परिवार की एकता और RJD की साख के लिए बड़ा खतरा होगा.
2015 में RCP और PK ने मिलकर नीतीश-लालू के महागठबंधन को जिताया था. तब RCP JDU के बड़े नेता थे और PK रणनीति बनाते थे. अब दोनों फिर साथ हैं, लेकिन इस बार नीतीश के खिलाफ.
तेज प्रताप को लाइमलाइट से प्यार है, और वो इसके लिए कुछ भी कर सकते हैं. कभी वो कृष्ण भक्ति में डूबकर ‘वृंदावन बिहारी’ बन जाते हैं, तो कभी साइकिल चलाकर सुर्खियां बटोरते हैं. लेकिन सियासत सिर्फ सुर्खियों से नहीं चलती.
तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बिहार में भ्रष्टाचार इस कदर फैल चुका है कि हर टेंडर में 30% घूस ली जा रही है. ये पैसा ठेकेदारों से लेकर मंत्रियों तक पहुंचता है. तेजस्वी ने आंकड़े गिनाते हुए बताया कि इस साल 7 कैबिनेट मीटिंग में 76,622 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई, ज्यादातर निर्माण कार्यों के लिए.