जुलाना विधानसभा से विनेश फोगाट को टिकट देकर कांग्रेस मजबूत होती दिख रही है. रविवार (8 सितंबर) से ही विनेश फोगाट चुनावी प्रचार अभियान भी शुरू कर देंगी और ससुराल बख्ता खेड़ा में पंचायत को संबोधित करेंगी.
CG News: जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक दुर्ग के सीईओ को विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की ओर से आवेदन करने के कारण निलंबित कर बस्तर संलग्न कर दिया गया था.
Haryana Election 2024: कांग्रेस द्वारा जारी की गई उम्मीदवारों की पहली सूची को देखते हुए राजनीतिक जानकारों का कहना है कि टिकट बंटवारे में अधिकतर पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा की ही चली है.
आप को अधिक सीटें आवंटित करने में कांग्रेस की अनिच्छा हाल के लोकसभा चुनावों में आप के निराशाजनक प्रदर्शन को देखते हुए ज्यादा सीटें देने से परहेज कर रही है.
साक्षी मलिक ने कहा, “पार्टी में शामिल होना उनका व्यक्तिगत निर्णय है. मेरा मानना है कि हमें त्याग करना चाहिए. हमारे आंदोलन, महिलाओं के लिए लड़ाई को गलत धारणा नहीं दी जानी चाहिए. मेरी ओर से आंदोलन जारी है."
हरियाणा के किसानों में बड़ी संख्या जाटों की है और यह समुदाय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर भाजपा के खिलाफ खड़ा है. बुधवार को दोनों ओलंपियनों ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की.
Haryana Election 2024: राज्य की 90 सीटों के लिए अभी कांग्रेस ने उम्मीदवारों की कोई लिस्ट जारी नहीं की है. ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं की कांग्रेस हरियाण का दादरी विधानसभा सीट से विनेश फोगाट को चुनावी अखाड़ें में उतार सकती है.
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन कुमारी शैलजा और रणदीप सुरजेवाला सहित एक गुट कथित तौर पर हुड्डा की सत्ता को मजबूत करने से नाखुश है. किरण चौधरी (जो इस गुट का हिस्सा थीं) ने अपनी बेटी को लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिए जाने के बाद पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया.
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है, "पार्टी यूपी में कांग्रेस को तभी सीटें देगी, जब उसे अन्य राज्यों में बड़ी हिस्सेदारी मिलेगी." जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव से अन्य राज्यों में चुनाव लड़ने की पार्टी की योजना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वह "सपा को एक राष्ट्रीय पार्टी बनाना चाहते हैं और इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं".
Himachal Pradesh News: विधानसभा में अनिरुद्ध सिंह की बातों पर सत्तापक्ष की ओर से नहीं, बल्कि विपक्ष के सदस्यों की ओर से मेज थपथपाई गई. ऐसा विधानसभा में बेहद कम देखने के लिए मिलता है.