देवकीनंदन ने आगे कहा कि सनातन में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत तिलक से होती है. जबकि बड़ी संख्या में लोग खुद को हिंदू और सनातनी कहते हैं लेकिन वास्तव में वे सनातन के नियमों और परंपराओं का अनुसरण नहीं करते हैं.