‘तिलक के बिना पूजा स्वीकार नहीं’, देवकीनंदन ठाकुर बोले- मुस्लिम समाज धार्मिक परंपराओं का पालन करता है, तो हिंदू क्यों नहीं?
देवकीनंदन ठाकुर(File Photo)
Devkinandan Thakur On Tilak: कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने हिंदू धर्म में तिलक के महत्व को समझाया है. ठाकुर ने कहा कि मुस्लिम समाज के लोग नमाज पढ़ते समय टोपी लगाते हैं. लेकिन हिंदू अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन नहीं करते हैं. तिलक के बिना पूजा स्वीकार नहीं होती है. अगर सनातनी अपनी परंपराओं का ईमानदारी से पालन करें तो पूरी दुनिया में उनका परचम लहराएगा.
‘तिलक केवल चिन्ह नहीं आस्था का प्रतीक’
देवकीनंदन ठाकुर की भोपाल स्थित रुद्राक्ष किंग्सटन परिसर में शुक्रवार को भगवत गीता की कथा का शुक्रवार को पहला दिन था. इस दौरान देवकीनंदन ने हिंदू धर्म और परंपराओं के बाद में भी लोगों से बात की. उन्होंने बताया कि सनातन धर्म में तिलक केवल एक चिन्ह नहीं है. तिलक आस्था, विश्वास और अनुशासन का प्रतीक है. धार्मिक आयोजनों में परंपराओं को मानना जरूरी है. इससे भक्तों को लाभ मिलता है.
‘छोटी-छोटी बातों पर झूठ बोलना पाप की ओर ले जाता है’
देवकीनंदन ने आगे कहा कि सनातन में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत तिलक से होती है. जबकि बड़ी संख्या में लोग खुद को हिंदू और सनातनी कहते हैं लेकिन वास्तव में वे सनातन के नियमों और परंपराओं का अनुसरण नहीं करते हैं. हमको हिंदू दिखना नहीं बल्कि बनना है. सच में हिंदू बनने के लिए हमको सभी परंपराओं को पूरे मन से पालन करना होगा. जो लोग छोटी-छोटी बातों पर झूठ बोलते हैं, वे पाप की ओर चले जाते हैं.
‘अगर ईमानदारी दिखाएं तो पूरी दुनिया सनातन का ध्वज लहराएगा’
देवकीनंदन ने कथा के दौरान तिलक के महत्व पर विस्तृत चर्चा की. उन्होंने कहा कि भगवान राम, कृष्ण, शिव और हनुमान सभी स्वरूपों में तिलक दिखाई देता है. इसलिए हमको भी तिलक ही नहीं सनातन की परंपराओं को आत्मसात करना चाहिए. अगर हम ईमानदारी से सनातन की परंपराओं का पालन करें और उन्हें आदर्श बना लें तो भारत ही नहीं पूरी दुनिया में ही सनातन का परचम लहराएगा. हालांकि इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वे किसी दूसरे धर्म के लिए कुछ भी गलत नहीं कह रहे हैं. केवल सनातन के प्रति लोगों को जागरुक करना चाहते हैं.
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