ये प्रदर्शन जनरेशन-जेड के नेतृत्व में हो रहे हैं, जो सरकार और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं. प्रदर्शनकारी सरकार के भ्रष्टाचार और हाल ही में सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ आवाज उठा रहे थे. हालांकि सरकार ने सोशल मीडिया बैन हटा लिया, लेकिन गुस्सा कम नहीं हुआ.
नेपाल में केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद देश का राजनीतिक सिस्टम एक नाजुक मोड़ पर है. संवैधानिक प्रक्रिया के तहत, राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल अब नई सरकार के गठन के लिए संसद में बहुमत साबित करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे.
Nepal Gen-Z Protest: हिंसा और विरोध प्रदर्शन के बीच नेपाल में ओली सरकार पर भी संकट गहरा गया है. नेपाल में अभी प्रधानमंत्री केपी ओली की CPN (UML) और शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस की गठबंधन वाली सरकार है.
नेपाल की सड़कों पर Gen-Z का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा. 20 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत और सैकड़ों घायल होने के बाद भी आंदोलन और तेज हो रहा है. सरकार ने सेना बुला ली है, लेकिन सवाल ये है कि क्या दमन से ये क्रांति रुकेगी? युवा भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आजादी पर पाबंदी के खिलाफ एकजुट हो चुके हैं.
Nepal Gen Z Protest: नेपाल सरकार ने 4 सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स, व्हाट्सएप, रेडिट और लिंक्डइन सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया.
Bihar News: खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादी नेपाल के रास्ते बिहार में घुसपैठ कर चुके हैं.
GRP पुलिस की टीम आज अर्चना को भोपाल लेकर पहुंचेगी. इसके साथ ही 13 दिन से लापता चल रही अर्चना के मामले में कई खुलासे हो सकते हैं.
नेपाल में आए भूकंप के कारण भारत के आसपास के राज्यों में भी असर देखने को मिला. हालांकि भूकंप में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है.
Hindu Calendar: भारत में बने हिंदू कैलेंडर को अब केवल हिंदू तीज-त्योहारों के लिए बीएस इस्तेमाल करते हैं. मगर आज भी दुनिया में एक ऐसा देश है जहां इस हिंदू कैलेंडर से ही काम होता है. इस देश में सरकार और सरकारी कामकाज विक्रम संवत वाले हिंदू कैलेंडर से ही किए जाते हैं.
अब सवाल यह उठता है कि क्या नेपाल में हालात बांग्लादेश जैसे हो सकते हैं, जहां सरकार के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुए थे और कई लोगों की जान गई थी? नेपाल की स्थिति अब तक तो वैसी नहीं हुई, लेकिन अगर हिंसा और असंतोष बढ़ते गए, तो देश में राजनीतिक हालात खराब हो सकते हैं.