S Jaishankar: विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि मुंबई काउंटर-टेररिज्म का एक अहम प्रतीक है, न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए." उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य रहते हुए काउंटर-टेररिज्म कमेटी की अध्यक्षता भी की थी.
S Jaishankar In SCO Summit: एससीओ समिट को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान-चीन के सीपीईसी प्रोजेक्ट के कारण भारतीय संप्रभुता के उल्लंघन का मुद्दा उठाया है.
जयशंकर ने सम्मेलन के दौरान भारतीय हाई कमीशन का भी दौरा किया. इस दौरे में उन्होंने वहां के अधिकारियों से मुलाकात की और भारतीय समुदाय के सदस्यों से बातचीत की.
S Jaishankar In Islamabad: पाकिस्तान ने अगस्त माह में प्रधानमंत्री मोदी को SCO की बैठक में शामिल होने के लिए न्योता भेजा था, लेकिन दोनों देशों के बीच चल रहे खराब रिश्तों के चलते भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इस बैठक में शामिल हो रहे हैं.
Mohamed Muizzu: इस यात्रा के दौरान मुइज्जू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे. मुइज्जू पांच दिनों तक भारत में रहेंगे. केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री किरीटी वर्धन सिंह ने मोइज्जू का एयरपोर्ट पर स्वागत किया.
S jaishankar Pakistan Visit: विदेश मंत्रालय के अनुसार, सेना को तैनात करने का फैसला संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत लिया गया है. इसके तहत सरकार को शांति बनाए रखने में नागरिक प्रशासन की मदद के लिए सेना की टुकड़ियों को बुलाने का अधिकार है.
S Jaishankar: बीते अगस्त महीने के आखिर में पाकिस्तान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को SCO की बैठक में भाग लेने के लिए न्योता भेजा था. पाकिस्तानी प्रवक्ता मुमताज जहरा बलूच ने बताया था कि सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निमंत्रण भेजा गया है.
S Jaishankar: वेब सीरीज 'आईसी 814: द कंधार हाईजैक' को लेकर जारी विवादों पर जयशंकर ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, "मैंने फिल्म नहीं देखी, इसलिए मैं इसपर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा.
यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 23 अगस्त 2024 को यूक्रेन की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति जेलेंस्की से कहा था कि रूस और यूक्रेन को तुरंत मिलकर इस युद्ध को समाप्त करना चाहिए और भारत इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है.
मोदी ने जुलाई में पुतिन से मुलाकात की और इस बारे में बात की कि कैसे रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान में संभव नहीं है और कैसे बम और गोलियों के बीच शांति प्रयास सफल नहीं होते हैं.