Supreme Court: रेप के मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति और शिकायतकर्ता महिला ने कोर्ट के समक्ष एक-दूसरे से शादी करने की इच्छा जाहिर की.
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले को गौर से सुना और आखिरकार बेंगलुरू के पक्ष में फैसला सुना दिया. कोर्ट ने कहा, "हरे कृष्ण हिल मंदिर इस्कॉन बेंगलुरू का है, और इस्कॉन मुंबई का इस पर कोई अधिकार नहीं." इतना ही नहीं, कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के पुराने फैसले को भी पलट दिया, जिसमें मुंबई को मंदिर का कंट्रोल दिया गया था.
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में आरोपी फिरूराम साहू को तीन साल बाद बरी कर दिया है. कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सिर्फ परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है. जानें पूरा मामला-
कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर पर रोक नहीं लगाई है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. मामले में कल सुनवाई की जाएगी.
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शिकायत की. 8 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल को बिल मिलने के 3 महीने में फैसला करना होगा. अगर विधानसभा वही बिल दोबारा पास करे, तो 1 महीने में मंजूरी देनी होगी. राष्ट्रपति को भी बिल पर 3 महीने में फैसला करना होगा.
याचिका दायर करने वाले पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने कोर्ट में दलील दी. उनका कहना था कि बंठिया आयोग ने महाराष्ट्र में ओबीसी को स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण दे दिया, लेकिन इसके लिए जरूरी शर्तें पूरी नहीं की गईं.
Supreme Court Judges Property: देशवासियों का भरोसा देश की जुडिशियरी (Judiciary) पर बना रहे इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीशों की संपत्ति और देनदारियों की जानकारी को अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है.
दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुल्ताना बेगम ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. लेकिन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे 'बेतुका और बे-सिर-पैर' बताते हुए तुरंत खारिज कर दिया.
Waqf Amendment Act: मोदी सरकार ने पाक को झटका देते हुए 2 न्यूज पोर्टल के एक्स हैंडल को बैन कर दिया है. भारत सरकार ने न्यूज पोर्टल बलूचिस्तान टाइम्स और बलूचिस्तान पोस्ट के X अकाउंट पर रोक लगाई है.
कोर्ट ने बिल्कुल साफ और दो टूक बात कही. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ ये कहना कि पति 40 साल का है और सक्षम दिखता है, ये मुआवजा न देने का बहाना नहीं बन सकता. अगर पति की अपनी कमाई का कोई सबूत नहीं है, तो माना जाएगा कि वो पत्नी की कमाई पर निर्भर था. कोर्ट ने कहा कि आज के जमाने में परिवार अलग-अलग तरह से चलते हैं.