जंगलों में छिपा है रावण-मंदोदरी का विवाह मंडप! जानिए सिंगरौली की माड़ा गुफाओं का रहस्य
Mada Caves Vivah Mandap Mystery: मध्य प्रदेश पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों, अलग संस्कृति और खास तरह के खानपान के लिए जाना जाता है. वहीं देशभर में एमपी अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी मशहूर है. मध्य प्रदेश एक ऐसा राज्य है, जहां आज भी कई स्थानों पर ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद हैं. ऊर्जाधानी कहे जाने वाले एमपी के सिंगरौली जिले में माड़ा की गुफाएं (Mada Caves) स्थित हैं, जो कि सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों में से एक हैं. आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक धरोहर के बारे में.
माड़ा की गुफाएं सिंगरौली के जिला मुख्यालय वैढ़न से लगभग 32 किलोमीटर दूर माड़ा गांव के जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित हैं.
ये गुफाएं 7वीं से 8वीं शताब्दी (रॉक-कट आर्किटेक्चर) की प्राचीन भारतीय वास्तुकला का एक नमूना है.
स्थानीय लोक कथाओं के अनुसार, रावण और मंदोदरी का विवाह इसी स्थान पर हुआ था. इस गुफा की बनावट एक पारंपरिक विवाह मंडप जैसी है, जिसमें बड़े-बड़े नक्काशीदार खंभे और मूर्तियां बनी हुई हैं.
बता दें कि इस गुफा के प्रवेश द्वार पर भगवान गणेश की एक विशाल और प्राचीन प्रतिमा स्थापित है.
यह एक विशाल गुफा है जो भगवान शिव को समर्पित है. यहां गुफा के गर्भगृह में एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित है. इसकी रॉक-कट वास्तुकला पर्यटकों को सबसे ज्यादा आकर्षित करती है.
ऐसा माना जाता है कि इस गुफा का संबंध रामायण काल के रावण से है. यहां चट्टानों को काटकर रहने के लिए कमरे और चौकियां बनाई गई हैं, जो उस दौर के बारीक शिल्प कौशल को दर्शाती हैं.
यह गुफा अपने प्राकृतिक जल स्रोत के लिए प्रसिद्ध है. यहां पहाड़ी के भीतर से लगातार पानी की धारा बहती रहती है, जिससे यहां एक छोटा सा कुंड बना हुआ है. इसके पास ही एक प्राचीन शिव मंदिर भी है.
कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि इन गुफाओं का उपयोग प्राचीन काल में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा ध्यान और निवास के लिए भी किया जाता था.
यहां पर घूमने जाने के लिए अक्टूबर से मार्च का महीना सबसे बेस्ट माना जाता है. मानसून के दौरान भी जलजलिया माड़ा के आसपास की हरियाली देखने लायक होती है.
इन गुफाओं को किसी ईंट या गारे से नहीं बनाया गया, बल्कि पूरी की पूरी ठोस ग्रेनाइट पहाड़ी को भीतर से काटकर तराशा गया है.